प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने टूजी घोटाले की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के सामने पेश होने से साफ इनकार कर दिया।
उन्होंने इसे लेकर भाजपा नेता यशवंत सिन्हा की मांग बुधवार को ठुकरा दी। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है और सभी दस्तावेज जेपीसी के पास उपलब्ध हैं।
गौरतलब है कि जेपीसी सदस्य सिन्हा ने दो दिन पहले पीएम को पत्र लिखकर उनसे समित के सामने पेश होने की मांग की थी।
छिपाने को कुछ नहीं
प्रधानमंत्री ने सिन्हा को भेजे जवाबी पत्र में कहा कि कौन से साक्ष्य और किस व्यक्ति को जेपीसी के समक्ष पेश होना है, इस तरह के फैसले जेपीसी और उसके अध्यक्ष द्वारा आंतरिक रूप से तय करने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2008 में हुए टूजी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में स्वयं उनके और सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है। उन्होंने पत्र में लिखा कि सिन्हा को जानकारी है कि सभी उचित रिकॉर्ड और दस्तावेज जेपीसी के पास पहले से ही उपलब्ध हैं।
नियमों के खिलाफ
इसके पहले प्रधानमंत्री को लिखे सिन्हा के पत्र से जेपीसी में आंतरिक कलह फैल गई थी। समिति के अध्यक्ष पीसी चाको ने मंगलवार को सिन्हा की मांग ‘राजनीतिक स्टंट’ करार दिया था।
चाको ने कहा कि प्रधानमंत्री को सिन्हा की ओर से पत्र लिखकर सीधे तौर पर यह कहना कि वह (मनमोहन सिंह ) जेपीसी के समक्ष पेश हों, स्थापित नियमों के खिलाफ है।
सिन्हा ने पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा द्वारा जेपीसी से की गई मांग को आगे बढ़ाते हुए कहा था कि प्रधानमंत्री को समिति के समक्ष पेश होना चाहिए।
पूर्व वित्त मंत्री की दलील है कि राजा ने सिंह के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। सिन्हा ने जेपीसी की बैठक दो महीने तक न बुलाए जाने को लेकर भी गंभीर आपत्ति व्यक्त की थी।