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मोदी की नाक के नीचे हो रही है 'फिजूलखर्ची'

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आर्थिक रूप से तंगहाल कंपनी एयर इंडिया में एक-एक पैसे कमाने के लिए भले ही भारी जद्दोजहद करनी पड़ रही हो, लेकिन फिजूलखर्ची में कहीं कोई कमी नहीं है। कंपनी की ऐसी नीति की वजह से करदाताओं की गाढ़ी कमाई यूं जी लुटाई जा रही है, जो कि राष्ट्रीय संसाधन की बरबादी है।
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नरेन्द्र मोदी सरकार बार-बार इस बात पर जोर देती है कि एयर इंडिया की कार्य शैली में बदलाव लाया जा रहा है, लेकिन कंपनी के प्रबंधन के कामकाज को देख कर नहीं लगता है कि इसमें बदलाव हो रहा है।

अब कर्मचारियों की पोस्टिंग को ही देख लें तो इसके अधिकतर विमान इस समय दिल्ली हब से संचालित हो रहे हैं, लेकिन पायलट एवं क्रू के ज्यादातर सदस्यों की पोस्टिंग मुंबई हब में है।
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फाइव स्टार होटलों में रुक कर ड्यूटी

मुंबई में पोस्ट लोगों को ड्यूटी करने दिल्ली आना पड़ता है तो कंपनी उसे पहले विमान से दिल्ली लाती है, उसे दिल्ली में फाइव स्टार होटल में ठहराती है ताकि अगले दिन विमान ले कर जा सकें।

इसी तरह वापसी में उन्हें एक दिन दिल्ली में होटल में ठहरा कर वापस मुंबई भेजा जाता है। इस चक्कर में जहां फाइव स्टार होटल का बिल भरना पड़ता है, वहीं कर्मचारियों का कार्यसमय और हवाई जहाज में सीट की बरबादी होती है।

कंपनी के एक अधिकारी के मुताबिक इन दिनों दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास के पास स्थित अशोक होटल में एयर इंडिया के नाम रोज 130-135 कमरे बुक हो रहे हैं, जबकि पिछले साल जनवरी-फरवरी में करीब 100 कमरे बुक हो रहे थे।

नहीं रुकते एयर इंडिया के होटल में

यहां उल्लेखनीय तथ्य यह है कि एयर इंडिया का दिल्ली हवाई अड्डे के पास में ही एक फाइव स्टार होटल है, लेकिन कंपनी की माली हालत की तरह हाटेल भी बदहाल है। इसलिए उसमें इसके कर्मचारी नहीं ठहरना चाहते।

इसलिए इनको अशोक होटल में ठहराया जाता है। इन कर्मचारियों को यहीं पोस्ट कर दिया जाए तो इन सब खर्च और कवायद से मुक्ति मिल जाएगी।

यही नहीं, हवाई जहाज के रख-रखाव के मद में भी कंपनी के करोड़ों रुपये यूं ही जाया हो रहे हैं। एयर इंडिया के पास ए 320 श्रेणी के 60 विमान हैं।
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विदेशों में होता है मेंटनेंस

आपको बता दें कि ये विमान पुराने पड़ गए हैं, इसलिए विमानों और इंजनों की नियमित ओवरहालिंग/मेंटनेंस की जरूरत पड़ती है। कंपनी ने इस किस्म के विमान के ओवरहालिंग की सुविधा दिल्ली में बना रखी है, लेकिन यहां स्पेयर पार्ट्स का हमेशा टोटा बना रहता है।

यही कारण है कि विमान के इंजन को ओवरहालिंग/मेंटनेंस के लिए विदेश भेजा जाता है। सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली के बजाय विदेश में मेंटनेंस करवाने पर 10 लाख डॉलर (6.3 करोड़ रुपये) से भी ज्यादा का खर्च बैठता है।

फिर भी ऐसा किया जाता है। बताया जाता है कि ऐसा करने में कंपनी के इंजीनियरिंग एवं फाइनेंस विभाग के कुछ अधिकारियों की विशेष रूचि होती है ताकि उन्हें कुछ विशेष फायदा मिल सके।
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