किंगफिशर के उड़ान का लाइसेंस कैंसिल होने के बाद आकाश के बाजार पर मजबूत पकड़ बनाने के लिए एयर इंडिया अपने लाइसेंस प्राप्त कर्मचारियों के भत्तों को बाजार के अनुरूप बनाने जा रही है।
विशेष वेतन भत्तों के लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने इस बाबत एक प्रस्ताव प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) के पास भेजा है। बृहस्पतिवार को होने वाली सीसीईए की बैठक में इस प्रस्ताव को रखा जाएगा। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग और कानून एवं न्याय मंत्रालय की ओर से इस प्रस्ताव पर अनापत्ति पहले ही मिल चुकी है।
जानकारी के मुताबिक एयर इंडिया के कर्मचारियों के लिए डीपीई पे स्केल की संस्तुति के लिए भी प्रस्ताव में कहा गया है। हालांकि यह पे स्केल एक अप्रैल 2007 से लागू किया जाना है। लेकिन सरकार पर इसका वित्तीय भार नही पड़ेगा। यह पे स्केल उस दिन से लागू माना जाएगा जिस दिन इसे समिति की अनुमति मिलेगी।
इसके अलावा एयर लाइन के पायलटों को फ्लाइंग भत्ता दिए जाने का भी प्रस्ताव है। मंत्रालय ने इस भत्ते को 70 घंटे पर नियत करने की अनुशंसा की है। कमांडर अथवा कैप्टन के लिए फ्लाइंग ऑवर का बेस रेट अधिकतम 3000 रुपये और न्यूनतम 2500 रुपये प्रति घंटा तय किए जाने की सिफारिश की गई है। इनके लिए अतिरिक्त उड़ान किए जाने की दशा में प्रोत्साहन की व्यवस्था भी की गई है।
कार्यकारी पायलट के लिए वास्तविक उड़ान के आधार पर फ्लाइंग भत्ता दिए जाने की वकालत की गई है। विदेश की उड़ान में जाने वाले पायलट और केबिन क्रू को ओवर भत्ता दिए जाने को कहा गया है। बड़े वायुयान उड़ाने वाले पायलटों के लिए वाईड बॉडी एलाउंस की व्यवस्था की गई है।
पायलटों, एयरक्राफ्ट इंजीनियरों, टेक्निकल अधिकारियों तथा केबिन क्रू के लिए विशेष भत्तों की संस्तुति की अनुमति सीसीईए से मांगी गई है। यह अलग बात है कि घाटे में चल रही यह कंपनी अभी कुछ दिनों पूर्व सरकार से विशेष पैकेज की मांग कर रही थी।
हालांकि जानकारों का कहना है कि मौजूदा समय निजी क्षेत्र के एयरलाइंसों के पायलटों को जो भत्ता दिया जा रहा है, वह एयर इंडिया के पायलटों को दिए जा रहे भत्ते से कम है। इससे बाजार के हिसाब से भत्ता देने की बात यदि सीसीईए स्वीकार कर लेता है तो एयर इंडिया के पायलटों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।