हमें इस बजट से व्यापक उम्मीदें थीं और मुझे खुशी है कि इनमें से अधिकांश को पूरा किया गया। नई एनडीए सरकार बनने के करीब छह सप्ताह के भीतर ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बजट को तैयार किया गया। इस तरह, समय की कमी और आंतरिक व बाहरी मोर्चे पर देश के सामने मौजूद आर्थिक चुनौतियों को देखते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली की उनके व्यावहारिक बजट प्रस्तावों के लिए प्रशंसा करनी चाहिए।
जेटली का यह बजट विकास को पटरी पर लाने और अर्थव्यवस्था में रिकवरी के उद्देश्यों को पूरा करने वाला है। स्पष्ट रूप से देखें तो प्रधानमंत्री जिन प्राथमिकताओं की चर्चा पिछले छह से आठ महीने से कर रहे थे, उन्हें बजट में तरजीह दी गई है।
व्यापक आर्थिक नजरिए से देखें तो बजट का जोर वित्तीय मजबूती पर है, जो कि निश्चित रूप से समय की जरूरत भी है। विशेषकर मैन्यूफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर पर खास जोर दिया गया है। अर्थव्यवस्था को तेज विकास के रास्ते पर लाने में इन दोनों सेक्टरों की भूमिका काफी अहम है।
सरकार जीएसटी को जल्द से जल्द प्रभावी बनाने और नया डीटीसी बिल लाने को लेकर जो प्रतिबद्धता दिखाई है, वह एक सकारात्मक संकेत है। खाद्य एवं ईंधन सब्सिडी को बेहतर तरीके से जरूरतमंदों तक पहुंचाने के लिए वित्त मंत्री ने सब्सिडी प्रणाली की समीक्षा करने की बात कही है। यह एक सराहनीय कदम है।
बजट को नीतिगत नजरिए से देखा जाए तो रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा एफआईपीबी रूट से भारतीय प्रबंधकीय नियंत्रण के साथ मौजूदा 26 फीसदी से बढ़ाकर 49 फीसदी करने से घरेलू मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा।
वित्त मंत्री ने अपने बयान में साफ किया कि उनका इरादा रक्षा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भरता कम करने और रक्षा खरीद व्यवस्था को बेहतर बनाने की है। यह एक बहुत ही सकारात्मक पहल है। मुझे उम्मीद है कि भारतीय मैन्यूफैक्चरिंग उद्योग देश की अर्थव्यवस्था के इस महत्वपूर्ण सेक्टर के स्वदेशीकरण में अब अपनी अधिक प्रभावकारी भूमिका निभाने में सक्षम हो सकेगा।
बजट में सड़क, राष्ट्रीय राजमार्ग एवं एक्सप्रेसवे, बंदरगाह, हवाई अड्डे, बिजली, नवीन एवं अक्षय ऊर्जा, औद्योगिक गलियारा, स्मार्ट शहरों आदि के जरिए इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने के प्रस्ताव अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने वाले उपाय हैं। विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) के संचालन के लिए प्रभावकारी कदम उठाने के प्रति सरकार ने जो प्रतिबद्धता दिखाई है, वह स्वागत योग्य है। इससे निवेशकों का भरोसा दोबारा बहाल होगा और अनुपयोगी भूमि का इस्तेमाल प्रोडक्टिव उद्देश्यों के लिए किया जा सकेगा।
ऑटोमोटिव इंडस्ट्री के संबंध में सरकार ने पिछले माह उत्पाद शुल्क पर छूट की सीमा 31 दिसंबर 2014 तक जारी रखने का फैसला किया। हमें उम्मीद है कि बजट में मैन्यूफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के लिए जो उपाय किए गए हैं, वह देश में सभी वर्ग के वाहनों की मांग बढ़ाने में मददगार होंगे। इसका लाभ ऑटोमोटिव कंपोनेंट बनाने वाली घरेलू कंपनियों को भी मिलेगा।