देश की एक बड़ी कंपनी को इतना ज्यादा लाभ हुआ है कि वो सरकार को 18,000 करोड़ रुपए देगी।
सार्वजनिक क्षेत्र की महारत्न कंपनी कोल इंडिया (सीआईएल) ने वित्त वर्ष 2013-14 के लिए 29 रुपये प्रति शेयर कुल 18,317 करोड़ रुपये का अंतरित लाभांश देने की घोषणा की है। इसके तहत सरकार को कंपनी में अपनी 90 फीसदी हिस्सेदारी के अनुसार 16,485.17 करोड़ रुपये हासिल होंगे।
बोर्ड की बैठक के बाद कोल इंडिया के चेयरमैन एस. नरसिंग राव ने बताया कि कंपनी की ऑडिट कमेटी की सिफारिशों के अनुरूप हमने 29 रुपये प्रति शेयर यानी 290 फीसदी लाभांश को मंजूरी दे दी है। शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये है। मार्च 2013 तक 62,236 करोड़ रुपये की नकदी पर बैठी सीआईएल 25 जनवरी से लाभांश का भुगतान करेगी। पिछले साल कंपनी ने 9.7 रुपये प्रति शेयर का अंतरिम लाभांश दिया था।
केंद्र सरकार को कोल इंडिया में अपनी 90 फीसदी हिस्सेदारी के तहत 16,485.17 करोड़ रुपये का लाभांश मिलेगा। इसमें यदि 3,113 करोड़ रुपये का लाभांश डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स शामिल कर लिया जाए, तो सरकार को कुल 19,598.76 करोड़ रुपये मिलेंगे।
सरकार ने चालू वित्तवर्ष के लिए विनिवेश का लक्ष्य 40,000 करोड़ रुपये रखा है और इसके तहत उसकी योजना कोल इंडिया में अपनी पांच फीसदी हिस्सेदारी बेचने की भी है। वहीं, कोल इंडिया के विनिवेश का कामगार संगठन जमकर विरोध कर रहे हैं।
कोल इंडिया की तरफ से यह घोषणा बीते शुक्रवार को वित्त मंत्री पी. चिदंबरम और कोल इंडिया, ओएनजीसी, इंडियन ऑयल सहित शीर्ष सरकारी कंपनियों के चेयरमैन के मुलाकात के बाद की है। सरकार ने अपने विनिवेश लक्ष्य को हासिल करने के लिए कवायद तेज कर दी हैं।