अंतरराष्ट्रीय साख निर्धारण संस्था मूडीज ने कहा है कि रुपये में आ रही गिरावट का असर भारत की क्रेडिट रेटिंग पर नहीं पड़ेगा। हालांकि निजी क्षेत्र की कंपनियों पर भारी विदेशी कर्ज की देनदारी बढ़ जाएगी।
मूडीज की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय रुपये में आ रही गिरावट विदेशी कर्ज के भुगतान के लिहाज से काफी संवेदनशील है। लेकिन सरकार के कर्ज भुगतान की क्षमता पर रुपये के अवमूल्यन का सीधा असर बहुत ही सीमित है। मूडीज का कहना है कि भारतीय रुपये में मौजूदा उठापटक 1991 के संकट की तुलना में काफी कम है। उस समय कम रिजर्व और भारी चालू खाता घाटे की वजह से भारत के सामने भुगतान का संकट खड़ा हो गया था।
पिछले सप्ताह विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा बड़े पैमाने पर फंड की निकासी और चालू खाता घाटा बढ़ने से से रुपया डॉलर के मुकाबले 56.40 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक आ गया था। चालू खाता घाटा दिसंबर 2011 में जीडीपी का 4 फीसदी तक हो गया जो मार्च 2011 में जीडीपी का 2.6 फीसदी था।
हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा उठाए गए कदमों से रुपये में सुधार आया है। मूडीज ने कहा कि इस साल भारतीय कंपनियों को विदेशी मुद्रा में भारी भुगतान करना है। रुपये में अवमूल्यन के कारण इन्हें खासा नुकसान उठाना पड़ेगा।