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इन 5,000 करोड़ का कोई नहीं है दावेदार

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देश के बैंकों के तकरीबन डेढ़ करोड़ निष्क्रिय खातों में 51 अरब 25 करोड़ रुपये ऐसे पड़े हैं, जिनका दावा करने वाला कोई नहीं है। यह जानकारी वित्त मंत्री अरुण जेटली ने लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में दी है।
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वित्त मंत्र ने बताया कि विभिन्न वाणिज्यिक बैंकों में पिछले साल 31 दिसंबर को 1,45,54,950 ऐसे खाते थे जो 10 साल या उससे ज्यादा अवधि से निष्क्रिय पड़े हैं और उनमें पड़े 51 अरब 24 करोड़ 98 लाख से अधिक रुपयों का कोई दावेदार नहीं है।

जेटली ने बताया कि ऐसी राशि वर्ष 2005 के अंत में सिर्फ नौ अरब 29 करोड़ 54 लाख थी जो अगले आठ साल में साढ़े पांच गुना से भी ज्यादा हो गई है।

पिछले तीन-चार साल में इसके बढ़ने की रफ्तार में भी तेजी आई है। निष्क्रिय खातों की संख्या वर्ष 2006 और 2008 को छोड़कर हर साल बढ़ी है। उनमें जमा राशि का ग्राफ भी लगातार चढ़ता ही जा रहा है।
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एसबीआई के खातों में जमा है अरबों रुपए

बिना दावे वाली राशि के मामले में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) सबसे आगे है, जिसके निश्क्रिय खातों में पडे़ 11 अरब 89 करोड़ रुपये का कोई दावेदार नहीं है।

अपने पांच सहायक बैंकों समेत एसबीआई बैंक समूह के पास 14 अरब 70 करोड़ रुपये की राशि निष्क्रिय खातों में है। सार्वजनिक बैंकों में छह अरब तीन करोड़ की राशि के साथ केनरा बैंक दूसरे और चार अरब 73 करोड़ 77 लाख से ज्यादा की राशि के साथ यूनियन बैंक ऑफ इंडिया तीसरे स्थान पर है।

निजी बैंकों में आईसीआईसीआई बैंक के पास सर्वाधिक एक अरब 27 करोड़ 71 लाख पये की राशि है, जबकि विदेशी बैंकों में चार अरब 14 करोड़ 74 लाख रुपये की राशि के साथ सिटी बैंक पहले स्थान पर है।
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निजी बैंकों के पास जमा है 493 करोड़ से ज्यादा

निजी बैंकों के पास कुल चार अरब 49 करोड़ रुपये से अधिक की ऐसी राशि है, जबकि विदेशी बैंकों के पास चार अरब 93 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि निष्क्रिय खातों में पड़ी है।

वित्त मंत्री ने बताया कि ऐसी राशियों से रिजर्व बैंक ने ‘जमाकर्ता शिक्षा एवं जागरूकता निधि’ की स्थापना की है, जिसमें 01 जुलाई 2014 तक 633 बैंकों ने 34 करोड़ 55 अरब 44 लाख रुपये जमा कराए गए हैं।

उन्होंने कहा कि जब भी निष्क्रिय खातों का दावेदार सामने आकर अपनी राशि लेना चाहे ले सकता है। इसके लिए समय सीमा का कोई प्रतिबंध नहीं है। इस साल 26 जून को जारी परिपत्र के अनुसार इस राशि पर उसे चार प्रतिशत की दर से साधारण ब्याज दिया जाएगा।
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