बीमा क्षेत्र में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) की सीमा २६ से बढ़ा कर ४९ फीसदी किये जाने संबंधी अध्यादेश का लाभ लेने के लिए कंपनियों की कवायद शुरू हो गई है। निजी क्षेत्र के मैक्स बूपा हेल्थ इंश्योरेंस ने तो घोषणा भी कर दी है कि वह विदेशी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए औपचारिक आवेदन दायर करने ही वाली है।
भारतीय कंपनी मैक्स इंडिया और ब्रिटिश कंपनी बूपा के संयुक्त उपक्रम मैक्स बूपा में इस समय हिस्सेदारी का अनुपात ७४:२६ का है। कंपनी ने २०१० में यहां काम शुरू किया था और स्वास्थ्य बीमा के क्षेत्र में यह निजी क्षेत्र की सातवीं सबसे बड़ी कंपनी है, जिसके पास करीब २० लाख ग्राहक हैं। उल्लेखनीय है कि पिछले महीने ही सरकार ने बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा २६ फीसदी से बढ़ा कर ४९ फीसदी किये जाने संबंधी अधिसूचना जारी की थी।
बूपा में इंटरनेशनल डेवलपमेंट मार्केट के प्रबंध निदेशक डेविड फ्लेचर ने इस निर्णय पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारतीय स्वास्थ्य बीमा क्षेत्र के प्रति किये गए वादे को निभाते हुए कंपनी ने यहां अपना निवेश बढ़ाने का फैसला लिया है। वह अपने भारतीय भागीदार मैक्स इंडया के साथ मिल कर मैक्स बूपा के विकास को नई ऊंचाई देंगे साथ ही भारतीय ग्राहकों के स्वास्थ्य की भी रक्षा करेंगे।
मैक्स इंडिया लिमिटेड के प्रबंध निदेशक राहुल खोसला का कहना है कि बेहद कम समय में इस कंपनी ने ग्राहकों के बीच अपना विश्वास कायम कर लिया है। अब विदेशी निवेश की सीमा बढऩे से वह ग्राहकों की और बेहतर तरीके से सेवा कर पाएंगे।