केंद्र सरकार ने आवश्यक दवाओं के दाम तय करने से जुड़े सभी मसले हल करने का दावा किया है। बुधवार को हुई मंत्रियों के समूह (जीओएम) की बैठक में नई दवा नीति को अंतिम रूप देते हुए जल्द अधिसूचना जारी करने का फैसला हुआ है। अभी भी जरूरी 348 दवाओं के दाम लागत के बजाय बाजार कीमतों के आधार पर ही तय होंगे। लेकिन दाम तय करने के तरीके में थोड़ा फेरबदल किया गया है, जिससे जरूरी दवाएं अपेक्षाकृत सस्ती हो जाएंगी।
मंत्रियों के समूह की बैठक के बाद कृषि मंत्री शरद पवार ने कहा कि दवा नीति से जुड़े सभी मुद्दे सुलझा लिए गए हैं और उन्हें पूरी उम्मीद है कि इसे 27 नवंबर से पहले इसे कैबिनेट की मंजूरी मिल जाएगी। रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस नीति को 25 नवंबर को अधिसूचित किया जा सकता है।
वित्त मंत्रालय के दबाव के बावजूद बाजार कीमत के बजाय लागत के आधार पर जरूरी दवाओं के दाम तय करने पर सहमति नहीं बन पाई है। लेकिन अब जरूरी दवाओं के मूल्य निर्धारण में बाजार में ज्यादा बिकने वाली दवा को ज्यादा तवज्जो (वेटेड एवरेज प्राइस) देने के बजाय सभी ब्रांड की औसत कीमत (एवरेज प्राइस) को आधार माना जाएगा। सरकार को 27 नवंबर तक इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखना है।
जरूरी दवाओं के मूल्य निर्धारण को लेकर वित्त मंत्रालय और जीओएम के बीच भी मतभेद रहे हैं। जिसके चलते दवा नीति को कैबिनेट की मंजूरी नहीं मिल पाई थी। जीओएम ने वेटेड एवरेज प्राइस का तरीका सुझाया गया था, जिस पर वित्त मंत्रालय को आपत्ति थी। वित्त मंत्री लागत के आधार पर दवा कीमतों के निर्धारण के पक्ष में हैं जबकि दवा उद्योग बाजार कीमतों के आधार पर ही दाम तय करना चाहते है। बुधवार को हुई मंत्रियों के समूह की बैठक में वित्त मंत्री पी. चिदंबरम भी मौजूद थे।
अभी तक सिर्फ 74 दवाएं ही जरूरी दवाओं की राष्ट्रीय सूची में शामिल हैं और इनकी कीमतों पर सरकार का नियंत्रण है। नई नीति में 348 दवाओं और इनके फॉर्मूलेशन को आवश्यक दवाओं की सूची में शामिल करने का प्रस्ताव है। वेटेड प्राइस के बजाय एवरेज प्राइस के आधार पर आवश्यक दवाओं के दाम तय होने कीमतें अपेक्षाकृत कम रहेंगी।