देश की करीब दो हजार कंपनियों में निवेशकों के 2500 करोड़ रुपये ऐसे हैं, जिसके लिए कोई दावा नहीं कर रहा है।
कॉरपोरेट अफेयर मंत्रालय के पास ऐसी दो हजार कंपनियों ने अपने निवेशकों का ब्यौरा भेजा है। यह सभी निवेश पिछले सात साल के अंदर निवेशकों द्वारा किए गए हैं।
कॉरपोरेट अफेयर मामलों के मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार अक्टूबर 2013 तक 2097 कंपनियों ने यह जानकारी दी है कि उनके पास 2504 करोड़ रुपये ऐसे जमा हैं, जिसको लेने के लिए कोई दावा नहीं कर रहा है। कंपनियों के पास यह निवेश डिपॉजिट, डिविडेंड और डिबेंचर के रुप में हैं।
मंत्रालय के अधिकारी के अनुसार कंपनियों के पास पड़ी यह राशि निवेशकों द्वारा पिछले सात साल के अंदर निवेश की गई है। ऐसे में मंत्रालय इस तरह की कवायद कर रहा है कि निवेशक कंपनियों से अपने निवेश के लिए दावा कर अपनी पूंजी निकाल सके।
अधिकारी के अनुसार कंपनियों की यह जानकारी मंत्रालय के विभाग आईईपीएफ पर भी अपलोड कर दी गई हैं।
मौजूदा कंपनी कानून-1956 के तहत अगर किसी कंपनी के पास निवेशकों की राशि सात साल से ज्यादा समय से पड़ी है, तो वह कनसॉलिडेटेड फंड ऑफ इंडिया में चली जाती है। इस तरह के करीब 700 करोड़ रुपये फंड में पड़े हैं।
अधिकारी के अनुसार नए कंपनी कानून-2012 में हम इस तरह का प्रावधान कर रहे हैं कि सात साल से ज्यादा समय से पड़ी राशि को भी निवेशक निकाल सके।