ग्रामीण इलाकों में कृषि आधारित लघु व छोटे उद्योगों को विकसित करने में मदद के लिए एमएसएमई मंत्रालय ने 200 करोड़ रुपये की मदद देेने का फैसला किया है।
इस स्कीम के तहत गांवों में टेक्नोलॉजी नेटवर्क सेंटर स्थापित करने से लेकर नई उद्यमिता तक को फंड मुहैया कराया जाएगा। मंत्रालय ने इस मामले में एक मसौदा जारी किया है, जिसपर संबंधित पक्षों से राय मांगी गई है।
एमएसएमई मंत्रालय के मुताबिक ग्रामीण इलाकों में रोजगार की कमी के कारण का पलायन हो रहा है। इसलिए गांवों में उद्यमिता को प्रोत्साहित कर नए रोजगार का सृजन और वहां की बेरोजगारी को कम करने के उद्देश्य से यह स्कीम लाई गई है।
इस स्कीम के तहत कृषि आधारित उद्योग को लगाने से लेकर उस क्षेत्र में किसी नए आइडिया पर काम करने तक को इस फंड से मदद दी जाएगी।
इसके तहत अगर कोई व्यक्ति कृषि व वन उत्पाद को बढ़ाने के लिए कोई आइडिया देता है और उस पर काम करना चाहता है, कृषि उत्पाद में वैल्यू एडीशन करता है, इस्तेमाल में नहीं आने वाले कृषि संबंधी पदार्थों को रिसाइकिल करने की योजना, ग्रामीण इलाके के लिए बिजनेस मॉडल जैसे मामले में आथिक मदद दी जाएगी।
मंत्रालय का मानना है कि ग्रामीण इलाकों में रोजगार के अवसर का सृजन तभी हो सकता है, जब ग्रामीण की कुशलता में बढ़ोतरी की जाए। इस काम के लिए प्रशिक्षण सेंटर व टेक्नोलॉजी सेंटर नेटवर्क खोलने की योजना है।
मंत्रालय के मुताबिक इस साल 15 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि हमारे देश का उत्पाद जीरो डिफेक्ट वाला होना चाहिए, ताकि हमें कोई इनकार नहीं कर सके। इस योजना के पीछे कृषि संबंधी उद्योगों के उत्पादों को जीरो डिफेक्ट बनाने का भी उद्देश्य है।
इस योजना को सिरे चढ़ाने के लिए एमएसएमई सचिव के नेतृत्व में एक काउंसिल का गठन किया जाएगा, जिसमें कई अन्य मंत्रालय के सचिव भी शामिल होंगे।