सत्ता में आने के बाद से ही देश में टेलीकॉम और आईटी क्षेत्र में मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र को बढ़ावा देने के ऐलान के बाद, अब उसे जमीनी स्तर पर उतारने की कवायद मोदी सरकार ने शुरू कर दी है।
टेलीकॉम मंत्रालय इसके तहत देश की प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों के साथ मिलकर रोडमैप पर चर्चा भी कर चुका है। शुरुआती स्तर पर उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और तमिलनाडु राज्यों में मैन्यूफैक्चरिंग जोन विकसित करने की संभावना तलाशी जा रही है। इंडस्ट्री के अनुसार मैन्यूफैक्चरिंग जोन के जरिए 10-15 लाख नए रोजगार के अवसर उत्पन्न होने की संभावना है।
मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग का बनेगा हब
सूत्रों के अनुसार टेलीकॉम मंत्री रविशंकर प्रसाद इस संबंध में इंडस्ट्री के साथ बातचीत भी कर चुके हैं। जिसके तहत मोबाइल मैन्यूफैक्चरिंग के लिए ईको सिस्टम विकसित करने की बात तय की गई है। इसमें कंपोनेंट मैन्यूफैक्चरिंग से लेकर आईपीआर (बौद्धिक संपदा अधिकार) आदि पर रोडमैप बनाने की कवायद शुरू की गई है।
बैठक में इंडस्ट्री ने सबसे ज्यादा चिंता आईपीआर को लेकर मंत्रालय से जताई है। उनके अनुसार जब तक आईपीआर को लेकर स्पष्टता नहीं आएगी, तब तक घरेलू कंपनियों के लिए खास तौर से भारत में प्लांट लगाना आसान नहीं होगा।
चीन को टक्कर देना आसान नहीं
कार्बन मोबाइल के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रदीप जैन के अनुसार देश में मोबाइल फोन निर्माण को बढ़ावा देने के लिए भारत को चीन से टक्कर लेनी होगी, जो कि आसान नहीं है। इसके लिए करीब 300-400 कंपोनेंट उद्योग को विकसित कर पूरा ईको सिस्टम विकसित करना होगा। साथ ही आईपीआर भी एक अहम मुद्दा है। सरकार को इन सब पहलुओं पर कदम बढ़ाकर जमीनी स्तर पर उसे उतारना होगा।
हर महीने बिकेंगे 3 करोड़ से ज्यादा फोन
भारत में अभी हर महीने 2 करोड़ से ज्यादा फोन बिक रहे हैं, जो बढ़ती मांग को देखते हुए अगले दो साल में 3 करोड़ से ज्यादा हो जाएगा। ऐसे में अगर सरकार मोबाइल मैन्यूफैक्चरिंग जोन विकसित कर लेती है, तो 10-15 लाख रोजगार के साथ कंपनियों के लिए अफ्रीकी और पूर्वी यूरोप सहित दूसरे देशों में निर्यात का एक बड़ा बाजार मिल जाएगा।