लोग कितना भी कहें कि इंटरनेट से जिंदगी बहुत आसान हो गई हो, लेकिन इससे बच्चों के दिमाग पर उलटा असर हो रहा है। ‘विंड आप रेडियो’ बनाने वाले ब्रिटेन के ट्रेवोर बेलिस ने इस बात की चेतावनी दी है कि स्क्रीन के सामने ज्यादा वक्त बिताने वाली ‘गूगल जेनरेशन’ की रचनात्मकता और व्यावहारिक कौशल कम हो रहा है। 75 वर्षीय बेलिस को डर है कि इंटरनेट पर निर्भर होने से नई पीढ़ी के दिमाग का विकास प्रभावित हो सकता है।
ऐसे में आने वाले वक्त में नई खोज करने वाले लोगों की कमी देखने को मिल सकती है। आजकल ज्यादातर बच्चों का समय स्मार्टफोन और कंप्यूटर पर बीतता है। गूगल सर्च की बजाय स्कूलों में बच्चों को प्रैक्टिल मॉडल्स या खिलौनों (Meccano Toys) से ट्रेनिंग दी जाए, तो वे नई चीजें बेहतर सीख सकते हैं।
बेलिस अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए बताते हैं कि कैसे उन्होंने बेहद कम उम्र में छोटी-छोटी डिवाइसेज बनाना सीख लिया था। बेलिस आज तक उस बात को नहीं भूले हैं, जब 6 साल की उम्र में अपने घर के आसपास वे कबाड़ इकट्ठा करके कुछ नया बनाने की कोशिश करते थे। एक दिन किसी महिला ने एक बक्सा देते हुए कहा-‘ट्रेव, तुम इससे एक पहिए वाली ठेला-गाड़ी बना सकते हो।’
ट्रेवोर बेलिस बडे़ कौतूहल से उसे देखते रहे और बाद में उन्हें लगा कि वे उस कबाड़ से पांच पहियों की गाड़ी या फोर्कलिफ्ट ट्रक जैसे खिलौने भी बनाये जा सकते हैं। बेलिस को उनके विभिन्न अविष्कारों के लिए जाना जाता है। खासतौर पर विकलांगों के लिए उन्होंने कई तरह के गैजेट्स बनाए हैं।