कहावत है कि मर्द को दर्द नहीं होता, लेकिन खुद को 18 साल तक लड़की समझने वाली राधिका (काल्पनिक नाम) का सबसे बड़ा दर्द यही है कि वो मर्द है।
महिला कॉन्सटेबल की भर्ती के लिए आवेदन करने वाली राधिका को यह कहकर अयोग्य घोषत कर दिया गया कि वो महिला नहीं, बल्कि पुरुष है।
टीओआई की खबर के अनुसार, अहमदनगर की राधिका का मामला पहली बार मई में सामने आया जब वह महिला पुलिस
कॉन्सटेबल के पद के लिए आवेदन करने मुंबई पहुंची। कोपरगांव तालुका में उसने आवेदन जमा किया।
आवेदन करने के दो हफ्ते बाद जेजे अस्पताल के डॉक्टरों ने राधिका का मेडिकल चेक-अप किया और एक चौंकाने वाला खुलासा किया। डॉक्टरों ने बताया कि राधिका महिला नहीं है।
एक गलती से पूरा डिपार्टमेंट जान गया उनका ब्रेस्ट साइज
कार्योटाइप टेस्ट का हवाला देते हुए जांच करने वाली टीम के एक डॉक्टर ने कहा कि राधिका की जांच में उन्हें 'XY' क्रोमोसोम मिला है। जिससे ये साबित होता है कि वह पुरुष है। इसके अलावा उसके जननांग भी पुरुषों के ही है, हालांकि कम विकसित जरूर हैं।
पर ताज्जुब की बात ये है कि राधिका का जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल का सर्टिफिकेट, राशन कार्ड, आधार कार्ड और 12वीं की मार्कशीट उसे लड़की ही बताती है। इन सभी प्रमाणिक पत्रों में उसका लिंग महिला लिखा हुआ है।
राधिका पर पहला शक एक महिला सब-इंस्पेक्टर को हुआ और उसने अपने उच्च अधिकारियों को इसके बारे में बताया। जिसके बाद उसकी जांच की गई, जिसमें पाया कि न तो उसमें महिला जननांग हैं और न ही पुरुष के।
उसके बाद उसका लिंग निर्धारित करने के लिए जेजे अस्पताल में परीक्षण कराया गया। जहां उसकी पहचान पुरुष के तौर पर हुई। रिपोर्ट को आधार मानते हुए राधिका की उम्मीदवारी खारिज कर दी गई।