जोड़ा न जामा, घोड़ी न शहनाई और न बैंडबाजा। दूल्हा-दुल्हन ट्रैक सूट में और हाथ में झाड़ू। अलबत्ता, हाथ में झाड़ू लिए इतने बाराती कि गिनना मुश्किल। दूल्हा-दुल्हन ने एक दूसरे को वरमाला पहनाई और जुट गए सफाई में। मंत्र न फेरे। कभी देखी है ऐसी शादी। इस अनूठी शादी की गवाह बनी हरकी पैड़ी।
बृहस्पतिवार को हरकी पैड़ी पर लाखों लोग इस ऐतिहासिक शादी के गवाह बने। दूल्हा बने अमनदीप और दुल्हन सीमा (खन्ना, लुधियाना) पंजाब के संपन्न परिवारों से ताल्लुक रखते हैं। दोनों परिवारों ने कई महीने पहले इनकी शादी एक नवंबर को तय की थी। लेकिन पिछले महीने डेरा सच्चा सौदा सिरसा की ओर से इसी तिथि को हरिद्वार में सफाई अभियान की सूचना आ गई। इनके परिवारों की गहरी आस्था डेरा सच्चा सौदा में है। शादी टाली जाए अथवा सफाई अभियान को छोड़ा जाए। इसे लेकर दोनों परिवारों के बीच बातचीत हुई। तय हुआ कि हरकी पैड़ी पर जयमाला डालकर शादी होगी।
दूल्हा-दुल्हन ने सुबह से ही हाथ में झाडू थाम रखी थी। संत गुरु गुरमीत राम रहीम सिंह हरकी पैड़ी आए तो दोनों ने एक-दूसरे को जयमाला पहनाकर पति-पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया। जयमाला डालते ही लाखों लोगों की तालियों से हरकी पैड़ी क्षेत्र गूंज उठा। इसके बाद पति-पत्नी दोनों हरकी पैड़ी पर गंगा घाटों की सफाई में जुट गए।
संत गुरु गुरमीत राम रहीम सिंह की रहमत से ही सब कुछ है। डेरा सच्चा सौदा की ओर से सफाई महाअभियान तय था तो इसे नहीं टाला जा सकता था। लाखों सेवादारों के बीच शादी हुई, इससे बड़ी बात क्या हो सकती है।
- अमनदीप, दूल्हा
ऐसी शादी खुशकिस्मत वालों की होती है। लाखों स्वयंसेवक हमारी शादी के गवाह बने। शादी करते ही हमने हाथ में झाडू संभालकर इंसानियत की सेवा में अपना योगदान दिया। इसके आगे सारी परंपराएं छोटी पड़ जाती हैं।
- सीमा, दुल्हन