महीने दो महीने या दो चार साल में धरती के नष्ट हो जाने की खबरों से परेशान लोगों के लिए एक अच्छी खबर है । खबर यह है कि सारे संसार और विश्व ब्रह्माण्ड को ऊर्जा देने वाला सूर्य अभी कम से कम पांच अरब वर्ष और इसी तरह तपता रहेगा, अपने सौर परिवार के सदस्यों को जीवन शक्ति देता रहेगा।
कुछ विद्वानों ने तो यहां तक लिखना शुरू कर दिया है कि ग्लोबल वार्मिंग जैसे जुमलों से भी डरने की जरूरत नहीं है । पृथ्वी और सौर मंडल के इतिहास में इस तरह के परिवर्तन तो होते ही रहते है। जिन बदलावों का असर दिखाई देता है, उनकी तुलना में नहीं दिखाई देने वाले बदलाव ज्यादा बड़े है।
अध्यात्म विद्या के अनुसार तो सूर्य की आयु ४ लाख ३२ हजार करोड वर्ष है । इसे पुराणों की भाषा में कल्प कहते है। अब खगोल विज्ञानी भी मानने लगे हैं कि कम से कम इतने समय तक सूर्य जवान बना और अपनी ऊर्जा बिखेरता रहता है ।
कार्ल सेमुअल ने अपनी पुस्तक- कास्मोस- में इन गणनाओं की विज्ञान से संगति बिठाते हुए कहा है कि युगों के अवधारणा से दुनिया के नष्ट होने की बात बहुत मेल खाती है।
ब्रह्माण्ड के जन्म लेने, बनने या विकसित होने और उसके आँगन को जीवन के खिलने योग्य बनने की अवधि अभी पांच अरब वर्ष ही बीती है। यह अवधि उसकी कुल जीवन अवधि का दस प्रतिशत ही है। मनुष्य के जिंदगी को आधार बना कर सोचें तो विश्व ब्रहमांड अभी सात वर्ष का शिशु ही है ।
सूर्य पांच अरब वर्ष पहले जन्मा था। अभी वह जवान ही है। कम से कम इतने ही समय तक वह और प्रखर बना रह सकेगा।
वैज्ञानिकों के अनुसार उसकी आरंभिक हाइड्रोजन संपदा का दस प्रतिशत हिस्सा ही हीलियम राख के रूप में परिणित हुआ है। उसके वृद्ध होने में अभी पांच खरब वर्ष का समय और लगेगा। तब वह इतना ईधन खर्च कर देगा कि उसका आकार उस खालीपन के कारण तीस गुना बढ़ जाएगा ।