हमारे-आपके समाज में लड़का कमाने लगे, अपनी जिम्मेदारियां संभाल लें तो उसे बड़ा समझा जाने लगता है लेकिन पापुआ न्यूगिनी की एक जनजाति में लड़कों को मर्द तभी माना जाता है, जब वो मगरमच्छ जैसे शरीर वाले हो जाते हैं।
पापुआ न्यूगिनी में सेपिक नदी के किनारे रहने वाली जनजाति में लड़कों को तब तक लड़की ही माना जाता है, जब तक कि उनके शरीर को मगरमच्छ जैसा नहीं बना दिया जाता। समुदाय में छोटे लड़कों को लड़की ही समझा जाता है।
कौमार्य भंग करने पर वेतन
उन्हें तभी लड़का समझा जाता है जब उनके शरीर पर उभार आ जाएं। इसके लिए इन छोटे लड़कों को एक खुले मैदान में लिटा दिया जाता है। उसके बाद समुदाय के बड़े बूढ़े चाकू या किसी धारदार हथियार से उनके शरीर पर हजारों निशान बनाते हैं जो मगरमच्छ की खुरदुरी त्वचा जैसे ही नजर आते हैं। इस पूरी प्रकिया में काफी खून बहता है लेकिन इसके बाद ही ये लड़के मर्द कहलाते हैं।
छह साल की उम्र में ही शारीरिक संबंध
कभी कभी तो इस प्रक्रिया में दस दिन तक का भी समय लग जाता है। खास बात ये है कि समुदाय के हर शख्स की पीठ पर एक अलग उभार होता है। किसी की पीठ की डिजाइन किसी दूसरे से मिलती नहीं है। इस प्रक्रिया के बाद ही यहां के लड़के मर्द कहलाते हैं और शादी योग्य समझे जाते हैं।