उस कबाड़ बेचने वाले शख्स को एक दिन अपने इकठ्ठा किए गए कबाड़ में से एक मेटल का अंडा मिला।
उसे लगा कि वो हर रोज की तरह मिलने वाले बच्चों के खिल्लौने का टूटा हिस्सा होगा।
क्योंकि वो अंडा थोड़ा भारी था और उस पर सोने जैसा रंग था, इसलिए उसने सोचा कि किसी लोहे के व्यापारी को ये बेचकर कबाड़ से ज्यादा रूपए कमाए जाए।