मेहनत और लगन से सूखे पहाड़ भी सोना उगल सकते हैं। यह लाइनें किसी फिल्म की स्क्रिप्ट की नहीं बल्कि हकीकत है हिमाचल प्रदेश के जमटा के बनाईल गांव के युवा किसान अंकुर ठाकुर की।
एमबीए अंकुर की मेहनत से आज यहां अनार का बगीचा सोना उगलने को तैयार है। एमबीए की डिग्री लेने के बाद अंकुर ने नौकरी के पीछे दौड़ने के बजाए घर के पास बागवानी करने का फैसला लिया।
बंजर जमीन में अंकुर ने खुद कुदाल चलाया और पहाड़ पर अनार का बगीचा लगा दिया। उनकी यह मेहनत अब रंग लाई है। बगीचे में अब फसल आ गई है।
बंजर भूमि पर बगीचा लगाकर एमबीए डिग्री होल्डर अंकुर ठाकुर ने पूरे क्षेत्र के लिए मिसाल पेश की है।
पहाड़ की सूखी माटी को देखकर हर कोई अंदाजा लगा सकता है कि इसमें कितनी मेहनत की गई है। कुदाल का एक-एक वार आज अंकुर की मेहनत का फल अनार के रूप में देने को तैयार है।
अंकुर ठाकुर के मुताबिक उन्होंने आधा बीघा जमीन में बगीचा लगा रखा है। सूखे के हालातों में भी अनार की बंपर पैदावार हुई है।
इस भीषण गर्मी में जहां लोग बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं वहीं किसान अंकुर ठाकुर ने अपनी पीठ पर पानी ढोकर अनार की फसल को तैयार किया है।
अंकुर का कहना है कि वह हर रोज आधा किलोमीटर दूर से पानी ढोते हैं। अनार ही नहीं पलम और लीची की फसल भी अच्छी तरह से तैयार है।
उन्होंने बताया कि वह अन्य युवा किसानों को भी अनार की पैदावार के बारे में जानकारी देने के इच्छुक हैं।