फरीदाबाद। बच्चा पैदा तो बिना दांत के होता है लेकिन उम्र के साथ साथ दांतों की नियामत मिलती रहती है। लेकिन अगर 13 साल तक भगवान दांत देने में कंजूसी करता रहे तो क्या कहा जा सकता है।
13 साल का यह लोगों की श्रेणी में शामिल है जिसे दांत देने में भगवान ने कंजूसी कर दी है।
सामान्य तौर पर 12 वर्ष की उम्र तक सभी दांत आ जाते हैं। लेकिन अभिषेक के मुंह में सिर्फ आठ दांत हैं और निराशा की बात ये है कि उसके मुंह में और दांत आने की उम्मीद भी खत्म हो चुकी है।
दिल्ली के मौलाना आजाद अस्पताल में इस बच्चे का इलाज चल रहा था। डॉक्टरों ने कह दिया है कि अब अभिषेक को आठ दांतों के साथ ही आगे की जिन्दगी बितानी होगी।
फिर भी खा लेते हैं गन्ना और चना
अभिषेक के पिता ने अमर उजाला को एक खास बातचीत में बताया कि उनकी बड़ी बेटी सुधा (15 साल) के मुंह में भी केवल 10 दांत हैं और आगे दांत आने की उम्मीद नहीं है।
अभिषेक और सुधा का कहना है कि पूरे दांत नहीं होने से उन्हें दोस्तों के बीच हिचक महसूस होती है। हालांकि कम दांतों की वजह से उन्हें खाने-पीने में उन्हें कोई दिक्कत नहीं होती है।
यहां तक कि गन्ना और चना भी ये बच्चे बड़े मजे से खा लेते हैं।
हो सकता है पार्सियल एनोडोन्सिया का मामला
दंत चिकित्सक डा0 लतिका बताती हैं कि यह पार्सियल एनोडोन्सिया का मामला हो सकता है। एनाडोन्सिया दो प्रकार का होता है कम्पलीट एनोडोन्सिया और पार्सियल एनोडोन्सिया। पार्सियल एनोडोन्सिया में कुछ दांत विकसित होते हैं जबकि कंप्लीट एनोडोन्सिया में एक भी दांत विकसित नहीं हो पाता।
डा. लतिका के अनुसार यह एक आनुवांशिक रोग है और इस तरह के मामले दुनिया में बहुत कम देखने में आते हैं।