ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट एक भली चंगी और स्मार्ट औरत सब कुछ छोड़ छाड़ कर जंगल में मिट्टी के घर में रहने लगे तो आप क्या कहेंगे। आप कहेंगे कि वो पागल हो गई है। लेकिन एमा ओरबेच पागल नहीं है, बस वो आधुनिक समाज के रहन सहन से उकता गई है। पिछले 13 साल से वेल्श हिल के जंगल में मिट्टी की झोपड़ी में रह रही ओरबेच प्रकृति से जुड़ गई है। आइए जानते हैं कि कैसे एक पड़ी लिखी मार्डन महिला जंगल में बिना सुख सुविधाओं के रहती है।
ओरबेच जंगल में बनी मिट्टी की झोपड़ी में अपनी तीन बकरियों, सात मुर्गियों और दो घोड़ों के साथ बहुत खुशी खुशी रह रही हैं। वो मिट्टी के चूल्हे पर खाना बनाती है और पास बह रहे झरने से पानी लाती है। ओरबेज की इस जन्नत में मानव तकनीक का प्रवेश निषेध है। इस झोपड़ी में न तो बिजली है और न ही अन्य कोई सुख सुविधा।
ओरबेज अपने लिए आस पास की जमीन पर खेती करके अन्न उगाती है और पानी की व्यवस्था भी खुद ही करती है। यहां बिजली नहीं है और ओरबेज अलाव जलाकर घर में रोशनी करती है। दिन में वो जंगल से लकड़ी चुनकर लाती है और रात में उसी से खाना बनता है और रोशनी होती है।
कैसे गुजरता है दिन
ओरबेज का दिन सब्जियां उगाने, अन्न की देखभाल करने और अपने मवेशियों की देखभाल करने में बीतता है। वो बिलकुल आदिम तरीके से रहती है जहां सब कुछ आदिम तरीके से होता है।
कब जाती है दुकान पर
ओरबेज साल में एक बार पास के कस्बे की दुकान पर जाती है। जहां से वो चावल और पसंदीदा चॉकलेट लाती है।
ओरबेज के बीस और तीस साल के बच्चे लंदन में रहते हैं और उनसे मिलने यहां आते रहते हैं। ओरबेज के अनुसार जब बच्चे आते हैं तब भी उनके लैपटॉप,मोबाइल और अन्य तकनीकी चीजें घर में नहीं आने दी जाती।