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आठवीं पास लड़के ने बनाया हवा से चलने वाला इंजन

Wed, 07 Nov 2012 01:18 PM IST
बिंद्राबाजार (आजमगढ़)।
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अब गाड़ी को चलाने के लिए महंगे होते पेट्रोल और डीजल की जरूरत ही नहीं रहेगी। अगर प्रयोग सफल हो गया तो मुहम्मदपुर गांव के आठवीं पास जयकर चौहान का हवा से चलने वाला इंजन क्रांति ले आएगा। चौहान ने हवा से चलने वाला इंजन तैयार किया है। इसे तैयार करने में उसे तीस साल लगे। प्रोजेक्ट को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के पास विचार के लिए भेजा गया है। अब परिषद इसकी मौलिकता की विशेषज्ञों से पड़ताल कराने जा रही है। वैज्ञानिकों की उम्मीदों पर प्रोजेक्ट खरा उतरा तो देश का हर किसान बिना डीजल के खेती कर सकेगा। सड़कों पर मोटर वाहन भी बगैर तेल के फर्राटे के साथ दौड़ सकेंगे।
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जयकर चौहान बचपन में पढ़ाई छोड़ कर मोटर मैकेनिक का काम सीखने लगा। वर्ष 1979-80 में जिला मुख्यालय पर बाइक, जीप आदि के इंजन बनाने लगा। इसके बाद मुंबई, कानपुर दिल्ली में मैकेनिक का काम किया। इस बीच उसकी मुलाकात गाजीपुर के रामा विश्वकर्मा से हुई। रामा के साथ काम करके जयकर ने काफी कुछ सीखा। बचपन से ही कुछ अलग करने की इच्छा रखने वाले जयकर 80 के दशक से ही हवा से चलने वाले इंजन के रिसर्च में लीन हो गया।

चार साल से आठ हार्स पावर का प्रदूषण मुक्त हवा चालित इंजन तैयार कर अपने घर पर ही खेत में रखा है। जयकार ने हवा से चलने वाले इंजन का नाम महावीर हनुमान रखा है। उसका दावा है कि इंजन में लगे एयर टैंक के माध्यम से कंप्रेशर पैदा करके करीब आठ हार्स पावर के इंजन से एक इंच की पाइप से पानी निकलता है। यदि तीन सौ पौंड की हवा मिलने लगेगी तो यह इंजन पूरी शक्ति के साथ चलना शुरू कर देगा। इसके लिए उसे अच्छी-खासी रकम लगानी पड़ेगी। धनाभाव के चलते वह अपनी इस मंशा को पूरा नहीं कर पा रहा। जयकार ने बताया कि तीस साल के रिसर्च में अब तक तीस लाख रुपये खर्च हो गए। हवा से चलाने के लिए पंपिंग सेट पर लगभग एक लाख और मोटर वाहन चलाने के लिए लगभग पांच लाख में एक इंजन पर खर्च आने का अनुमान है। धन के अभाव में उसका प्रोजेक्ट लटका पड़ा है।
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धन के लिए मई माह में प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश के साथ ही राज्यपाल, उत्तर प्रदेश प्रोद्योगिकी परिषद और प्रधानमंत्री तक को अपने प्रोजेक्ट को भेज कर सुझाव दिया कि उसके हवा चालित इंजन से बिना डीजल के ही किसान खेती कर सकता है। गांव-गांव में बिजली पैदा होगी। मोटर वाहन भी सड़कों पर चल सकते हैं। इस बीच प्रौद्योगिकी विज्ञान परिषद के सचिव ने सितंबर माह में बुलाया, लेकिन यह कह कर बजट उपलब्ध कराने से इंकार कर दिया कि किसी व्यक्ति विशेष का अनुदान नहीं दिया जा सकता है। जयकर की मानें तो उसके प्रोजेक्ट के लिए अमेरिका की विदेशी कंपनी आईसीएम ने भी उससे संपर्क किया था, लेकिन मदद के वास्ते शर्त रखी कि पहले अपने हवा चालित इंजन से सड़कों पर मोटर वाहन चला कर पेश करें। इस पर जयकार ने कहा कि वह अपना रिसर्च देश के हित में ही दान करेगा।
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