16 साल की नताशा की मौत तब हो गई जब उसके ब्रेन ट्यूमर को 13 अलग-अलग डॉक्टर भी पकड़ नहीं पाए। नताशा उन 13 डॉक्टरों के पास 24 बार इलाज के लिए गई थी लेकिन डॉक्टरों को पता ही नहीं चला कि उसे ब्रेन ट्यूमर है।
नताशा जो चाइल्डकेयर की पढ़ाई कर रही थी, ने कई बार सिरदर्द, पीठ दर्द, उल्टी और आंखों में परेशानी बताई थी। डॉक्टरों ने माइग्रेन बताकर उसे हमेशा भेज दिया। आखिर में 24 जनवरी को उसकी मौत हो गई।
ट्यूमर पता चलने के आठ दिन के बाद उसकी मौत हो गई। ट्यूमर उसके दिमाग और स्पाइन को जकड़ चुका था।
उसकी जुड़वां बहन फिओना ने डॉक्टरों पर आरोप लगाया और कहा कि उसे कई डॉक्टरों ने देखा था लेकिन किसी ने उसकी बातों पर ध्यान नहीं दिया।
अपनी इसी दिक्कत के कारण वह डॉक्टरों के पास 2008 से जा रही थी लेकिन 2010 आते-आते उसका दर्द काफी बढ़ चुका था।