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जान बचाने के लिए साईकिल को बना दिया एंबूलेंस

Mon, 04 Mar 2013 10:48 AM IST
मिर्जापुर।
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कहते हैं कि ईश्वर को जब किसी की मदद करनी होती है तो किसी न किसी को फरिश्ता बना कर भेज देता है। ऐसा ही कुछ ट्रेन से गिरे एक युवक के साथ हुआ जिसकी जान बचाने के लिए फरिश्ता साईकिल पर सवार होकर आया। इस फरिश्ते ने घायल युवक को साईकिल पर बैठाकर पांच किलोमीटर दूर अस्पताल में पहुंचाया।
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मामला मिर्जापुर का है। यहां विंध्याचल के देवराज ने फरिश्ते का काम करते हुए एक घायल युवक को साईकिल पर बैठा कर अस्पताल तक पहुंचा दिया। देवराज ने साबित कर दिया कि मानवता खून के रंग नहीं देखती। ओझला पुल के पास भागलपुर सूरत एक्सप्रेस (ताप्ती गंगा) से गिरकर घायल युवक अरमान को पटरी से उठाकर उसने साइकिल से करीब पांच किमी दूर जिला अस्पताल पहुंचाया। घायल युवक अरमान गाजीपुर जिले के सैदपुर का रहने वाला है।

करीब चार माह पूर्व गुजरात कमाने के लिए गया 18 वर्षीय अरमान भागलपुर सूरत एक्सप्रेस से लौट रहा था। सुबह करीब आठ बजे ट्रेन विंध्याचल से मिर्जापुर की तरफ बढ़ी तो कुछ दूर आगे जाकर सिगनल नहीं होने पर कटरा कोतवाली क्षेत्र के ओझलापुल के पास आकर रुक गई।
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इसी बीच बोगी में बैठे कुछ यात्री नीचे उतरकर टहलने लगे। अरमान भी नीचे उतर आया। इसी बीच सिगनल हो गया और ट्रेन बढ़ने लगी। यात्री बोगी में चढ़ने के लिए दौड़ने लगे। अरमान ने भी ट्रेन पर चढ़ने की कोशिश की। उसने जैसे ही बोगी पर चढ़ने के लिए गेट पर लगे राड को पकड़ा, यात्रियों के बीच धक्कामुक्की के कारण नीचे गिर पड़ा। ट्रेन के नीचे आते ही उसका एक पैर चपेट में आ गया और पंजा पूरी तरह कट गया। ट्रेन चली गई, लेकिन किसी यात्री ने चेन पुलिंग कर ट्रेन नहीं रोकी।

इसी बीच उधर से गुजरे देवराज की नजर पड़ी। देवराज का कहना है, उसने अपना फर्ज निभाया है, जबकि अरमान ने तहे दिल से शुक्रिया अदा किया। शाम को अरमान के घरवाले भी गाजीपुर से आ गए और बेहतर उपचार के लिए उसे जिला अस्पताल से ले गए।
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