कानून के दर पर देर है लेकिन अंधेर नहीं। लेकिन जब किसी को कानून की चौखट पर देर के साथ साथ अंधेर भी मिले तो क्या कहेंगे आप। 28 साल पहले चाकू लेकर घूमने वाले एक आरोपी को अदालत ने अब जाकर सजा सुनाई है। सजा सुनकर आप चौंक ही उठेंगे। सजा के रूप में आरोपी को दिन भर कटहरे में खड़े रहने का हुक्म सुनाया गया।
मामला हथियार रखने से संबंधित है। इलाहाबाद के सुल्तान अहमद को शाहगंज पुलिस ने 10 जुलाई 1984 को एक अदद चाकू के साथ गिरफ्तार किया था। उसके खिलाफ दफा 25 आयुध अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। हालांकि सुल्तान को मामले में जमानत तो मिल गई लेकिन मुकदमे के निस्तारण के लिए उसे 28 साल तक एड़ियां रगड़नी पड़ी।
आखिर थक हार कर सुल्तान ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने अदालत से गुजारिश की वह बेहद गरीब आदमी है, परिवार का अकेला कमाने वाला सदस्य है इसलिए रहम किया जाए। न्यायालय में न्यायिक मजिस्ट्रेट मनोज कुमार ने कहा कि अभियुक्त गरीब और अकेला कमाने वाला व्यक्ति है। इसलिए उदार दृष्टिकोण अपनाते हुए न्यायालय उठने तक खड़े रहने की सजा से दंडित किया जाता है।
महज 200 रुपए के लिए तीन साल कैद
सुल्तान की तरह ही एक केस गाजियाबाद में हुआ था। यहां सब्जी का ठेला लगाने वाले एक किशोर को पर्स चोरी के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। पर्स में दो सौ रुपए थे। इस आरोप में किशोर को करीब तीन साल तक जेल में रहना पड़ा था क्योंकि उसका मामला पुलिस की फाइलों में दब गया। बाद में मानवाधिकार आयोग की पहल पर किशोर का मामला खुला और सुनवाई आरंभ हुई।