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आखिर रेसिंग ट्रैक पर कैसे दौड़ पड़ी रहस्यमयी कार

Thu, 20 Sep 2012 03:53 PM IST
नई दिल्ली
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कहा जाता है कि मरने के बाद जीवन समाप्त हो जाता है और आगे-पीछे कुछ नहीं रह जाता है। लेकिन इसे क्या कहेंगे जब कार रेस की दीवानगी ने मरने के बाद भी लोगों ने उसकी कार को बगैर चालक ट्रेक पर दौड़ते हुए देखा। जापान में हुआ ये वाकया आज भी लोगों में सिहरन पैदा कर देता है।
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द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद जापान में पहली बार 5 मई 1963 को कार रेस का आयोजन हुआ। मसाओ असानो उस समय का मशहूर रेसर था। इसने जब भी रेस में हिस्सा लिया, विजयी रहा। ऐसा माना जा रहा था कि इस रेस में भी मसाओ ही विजयी होगा। रेस में मसाओ सफेद रंग की ऑस्टिन हैले कार ड्राइव कर रहा था। उसने अपने कार का नंबर 42 रखा। जापान के लोग 42 नंबर को मौत का नंबर मानते हैं। इसलिए बहुत से लोगों ने मसाओ को यह नंबर नहीं रखने की भी सलाह दी। लेकिन मसाओ ने इसे अंधविश्वास माना और इसी नंबर के साथ कार रेस में भाग लेने का फैसला किया।


रेस नागोया के सुजाका सर्किट पर शुरू हुई। रेस के दौरान जब मसाओ आखिरी टर्न ले रहा था, तभी उसकी कार सर्किट को छोड़कर एक खड्डे से जा टकरायी। मसाओ को काफी चोट लगी और उसकी मौत हो गयी। जापान ऑटो फेडरेशन ने इसके बाद 42 नंबर को बैन कर दिया।
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इस घटना के अगले साल 1964 में फिर से सुजाका सर्किट पर कार रेस का आयोजन हुआ। इस रेस में 42 नंबर की कोई कार नहीं थी। लेकिन जब रेस शुरू हुई तो लोगों ने देखा कि सर्किट पर ट्रैक के कौने कौने 42 नंबर की एक कार दौड़ रही है। यह कार कुछ समय के लिए सर्किट पर दौड़ती नजर आयी इसके बाद गायब हो गयी। वहां बैठे तमाम लोग आज भी यह दावा करते हैं कि उन्होंने इस कार को देखा था। आज तक यह घटना एक रहस्य बनी हुई है।
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