क्या आप आमतौर पर कमरे से बाहर आते समय पंखे और बल्ब बंद करना भूल जाते हैं। तो ये खबर आपके लिए ही है। भारतीयों की भूलने की बीमारी के चलते होने वाले बिजली नुकसान को कम करने के लिए कुछ इंजीनियरिंग के छात्रों ने अपना दिमाग चलाकर पॉवर सेवर बनाया है। अजय कुमार गर्ग इंजीनियरिंग कॉलेज से बीटेक शिवम दीक्षित एवं उनके मित्र शशांक सक्सेना ने मिलकर अत्रिम नामक एक कंपनी स्थापित की है जो मूलत: इनोवेशन की दिशा में काम कर रही है।
अपनी टीम के साथ मिलकर शिवम ने स्मार्ट ऑटोनामस पावर सेवर तैयार किया है। यह डिवाइस ऑडियो सेंसर के जरिए काम करती है। इसका खर्च महज 500-600 रुपये हैं। कमरे की स्विच बोर्ड में इसे लगाया जाता है। डिवाइस कमरे की आर्द्रता से लेकर तापमान तक सबका आंकलन करेगी।
यदि कमरे का तापमान अधिक होगा तो अपने आप ही फैन ऑन हो जाएगा। इसी तरह तापमान कम होने पर पंखा बंद हो जाएगा। ऑडियो सेंसर के जरिए व्यक्ति के कमरे से बाहर जाते ही वहां इस्तेमाल हो रहे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण स्वत: बंद हो जाएंगे।
सूरज की रोशनी से बुझेगी ट्रैफिक लाइट
बाराबंकी के पायनियर मांटेसरी स्कूल के बच्चों को दिन में जलती ट्रैफिक लाइट ने कुछ नया करने के लिए प्रेरित किया। विज्ञान कांग्रेस में प्रदर्शित अपने मॉडल के जरिए उन्होंने अपनी सृजनात्मकता सामने रखी। छात्रों ने एलडीआर (लाइट डिपेंडेंट रेसेस्टर) ) के जरिए यह विधि अमल में लाए हैं। बच्चों ने बताया कि ट्रैफिक लाइट में एलडीआर लगाने से उस पर ज्यों ही सूरज की रोशनी पड़ेगी लाइट बंद हो जाएगी। साथ ही अंधेरा होते ही वह स्वत: जल जाएगी।