पंचतंत्र की बंदर और घड़ियाल वाली कहानी याद है आपको? अरे, वही कहानी जिसमें घड़ियाल अपने दोस्त बंदर का कलेजा मांगता है। लेकिन समझदार बंदर समय रहते उसकी साजिश समझ जाता है और अपनी जान बचाने में सफल हो जाता है।
हे भगवान! इस लड़की के कान को ये क्या हो गया?
पर ये कहानी बंदर और घड़ियाल की नहीं है। ये कहानी है, घड़ियाल और मेंढक की।
मौत के मुंह पर सवारी
इस मेंढक को शायद पता भी नहीं होगा कि वो मौत की सवारी कर रहा है। वरना क्या कोई शिकार खुद शिकारी के मुंह पर जाकर बैठता है?
एक मुल्क ऐसा, जहां हर औरत के पास है एक पुरुष गुलाम
ये तस्वीर इंडोनेशिया के जकार्ता की है। जहां एक मेंढक, भूखे घड़ियाल की सवारी कर रहा है और वो भी बिना किसी डर के।
निगाहें शिकार पर टिकी हैं
ऐसा नहीं है कि घड़ियाल को पता नहीं है कि उसके मुंह पर मेंढक बैठा है। पहली तस्वीर में तो देखकर लगता है कि वो उसे खा सकता है लेकिन दूसरी तस्वीर देखने से पता चलता है कि वो उसे खा ही नहीं सकता।
आगे बढ़ता गया मेंढक
पहले तो ये मेंढक घड़ियाल के सिर पर बैठा था लेकिन धीरे-धीरे खिसकते-खिसकते वो आगे आ गया। हालांकि उसकी जान तो बच गई लेकिन ये मौत की सवारी से कम नहीं था।
ख्वाबों की मल्लिका नहीं, जीती-जागती एलियन है ये लड़की
फोटोग्राफर का कहना है कि घड़ियाल को देखकर लग रहा था कि उसका पेट भरा हुआ है और उसे मेंढक को खाने में कोई रूचि नहीं है।
फिसल गया मेंढक
हालांकि मेंढक की जान तो बच गई पर इसे पूरी तरह से घड़ियाल की मेहरबानी ही थी, जिसने मेंढक को अपना शिकार नहीं बनाया।
डेली मेल के अनुसार, मेंढक बीच रास्ते फिसल तो गया और अगर घड़ियाल चाहता तो उसे आसानी से पचा जाता।