एक शताब्दी से ज्यादा समय तक विलुप्त रही छिपकली की एक खास प्रजाति को दोबारा खोजा गया है।
मुंबई स्थित बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी (बीएनएचएस) के प्रकृतिविदों के मुताबिक देश के पूर्वी घाटों में पाई जाने वाली छिपकली की प्रजाति गैकोएला जेएपोरेंसिस बीते 135 सालों विलुप्त मानी जा रही थी।
पारिस्थितिकी विज्ञान के क्षेत्र में कार्य करने वाले सेंटर फॉर ईकोलॉजिकल साइंसेज (सीईएस) के शोधकर्त्ता इशान अग्रवाल और उनके सहयोगियों ने इस खास प्रजाति पर वर्ष 2008 से कार्य करना शुरू किया। वर्ष 2010 से शोधकर्ताओं ने इसे ढूंढने का गहन अभियान शुरू किया।
इसके बाद गैकोएला जेएपोरेंसिस प्रजाति की इस छिपकली को वर्ष 2011 में ओडिशा और आंध्र-प्रदेश के घाट वाले इलाकों में चार हजार मीटर की ऊंचाई पर चट्टानों के बीच खोजा गया। इस खोज की जानकारी को हाल ही में हामाड्राएड जर्नल में प्रकाशित किया गया है।
1877 में हुई थी पहली खोज
उड़ीसा के घाट वाले क्षेत्र जयपोर हिल्स क्षेत्र में ब्रिटिश कर्नल आर.एच. बैड्डोम ने गैकोएला जेएपोरेंसिस छिपकली को 1877 में खोजा और इसका सैंपल जमा किया था।
आकार और रंग में छिपकली की अन्य प्रजातियों से अलग गैकोएला जेएपोरेंसिस काफी रहस्यमयी किस्म की प्रजाति है। बीते 130 सालों तक कई बार इसे खोजने की कोशिश की गई। लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी।