नसबंदी के बाद आम इंसान की तरह कुत्ते भी तनाव का शिकार होते हैं। ये कहना है उस वैज्ञानिक का, जिसने कुत्तों के लिए प्रोस्थेटिक न्यूटिकल (आर्टिफिशियल अंडकोष) ईजाद किया था।
दूसरी तरफ नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हैल्थ क्लीनिकल स्टडी के वैज्ञानिक भी मानते हैं कि नसबंदी के दौरान शरीर से अंडकोष निकालने के बाद कुत्ते तनाव में आ जाते हैं। उनके शरीर में टेस्टोसटेरोन का असंतुलन उनके व्यवहार में आधिपत्य का पुट गायब कर देता है।
1995 में कुत्तों के लिए आर्टिफिशियल अंडकोष बनाने वाले ग्रेग मिलर का कहना है कि कुत्ते काफी समझदार होते हैं। वो जानते हैं कि नसबंदी के दौरान उनके शरीर का एक अमूल्य हिस्सा अलग हो गया है। वो अपने अंडकोष से बहुत प्यार करते हैं और उसके अलग होने से वो तनाव में आ जाते हैं।
मिलर ने कहा कि वो कुत्तों की नसबंदी को इसीलिए पसंद नहीं करते थे क्योंकि इससे कुत्तों का जीवन बेचारगी भरा बन जाता है। उन्होंने कहा कि कुत्ते भी शारीरिक और मानसिक तौर पर अपने अंडकोष की कमी महसूस करते हैं।
मिलर ने कहा कि जब उन्होंने कुत्तों के लिए प्रोस्थेटिक अंडकोष बनाया जिसके जरिए कुत्ते अपने शरीर में खामी महसूस नहीं करते हैं।
मिलर द्वारा बनाया गया प्रोस्थेटिक अंडकोष दरअसल कठोर सिलिकॉन से बना एक बूस्टर है जो कुत्तों के शरीर में अंडकोष की जगह इंप्लांट किया जाता है।
हालांकि यह अंडकोष सेक्स की इच्छा या प्रजनन के उद्देश्य को पूरा नहीं करता लेकिन फिर भी कुत्ते इसे शरीर में पाकर संतुष्ट रहते हैं।
नसबंदी का जानवरों पर पड़ने वाला असर देखने के लिए वैज्ञानिकों ने 12 बंदरो पर कुछ प्रयोग किए। इनमें से छह बंदरों की नसबंदी कर दी गई जबकि छह को जोड़ों में रहने के लिए छोड़ दिया गया।
कुछ समय बाद नसबंदी किए गए बंदरों के शरीर में प्रोस्थेटिक अंडकोष इंप्लांट किए गए। नसबंदी कराने वाले बंदर जो कुछ समय तक उपेक्षित और अधूरे शरीर जैसा महसूस कर रहे थे, एकाएक फिट उत्साहवर्धक और सामाजिक हो गए।
मिलर ने कहा कि वो अभी तक पचास देशों में पांच लाख से ज्यादा पैट के शरीर में प्रोस्थेटिक अंडकोष लगा चुके हैं और इसकी तादाद बढ़ती जा रही है।
मिलर कहते हैं कि ये इस बात का इशारा है कि अपने पालतू जानवर की परेशानी को समझ कर उनके मालिक उनके जीवन को फिर से सामान्य करना चाह रहे हैं।