क्या मांसाहारी लोग झूठे, बेइमान और झगड़ालू होते हैं। आप कहेंगे नहीं। लेकिन दिल्ली के एक स्कूल में छोटे छोटे बच्चों को किताब के माध्यम से यही बताया जा रहा था कि मांसाहारी लोग ऐसे ही होते हैं। मांसाहारियों के खिलाफ गलत बातें सिखाने वाली छठी क्लास की इस पाठ्यपुस्तक को हालांकि सख्त ऐतराज के बाद पाठ्यक्रम से हटा लिया गया है लेकिन लोगों का रोष समाप्त नहीं हुआ है। सवाल उठ रहा है कि बच्चों के लिए नैतिक और सामाजिक शिक्षा की किताबों की इतनी कमी क्यों है।
मांसाहारी व्यक्तियों को झूठा बेईमान, झगड़ालू तथा यौन अपराधी बताने वाली पुस्तक को छठी क्लास के पाठ्यक्रम में शामिल करने वाले देव समाज माडर्न स्कूल ने लोगों से माफी मांगते हुए पुस्तक को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। इसके साथ ही स्कूल ने एनसीईआरटी व पाठ्यक्रम तय करने वाली संस्थाओं पर सवाल भी खड़ा किया है।
उल्लेखनीय है कि ओखला सुखदेव विहार स्थित देव समाज पब्लिक स्कूल नं.2 में छठी कक्षा के छात्रों के पाठ्यक्रम में शामिल पुस्तक न्यू हेल्थवे, के एक चैप्टर में मांसाहार के बारे में भ्रामक व आपत्तिजनक जानकारी दी गई है। यह पुस्तक स्कूली बच्चों के लिए एस.चांद द्वारा प्रकाशित की गई है। पुस्तक के आपत्तिजनक अंश की जानकारी मिलने के बाद सीबीएसई ने स्कूल प्रबंधन को पत्र लिखकर स्पष्टीकरण मांगा था।
स्कूल के प्रिंसिपल मनोज मदान एवं प्रबंधक के.एल.वोहरा ने सीबीएसई को भेजे पत्र में मांसाहारियों के लिए आपत्तिजनक कंटेट वाली पुस्तक को पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए माफी मांगते हुए तत्काल उसे हटाए जाने की सूचना दी है। यही नहीं भविष्य में इस तरह की गलती नहीं होने की बात कही है। इसी पत्र में स्कूल प्रबंधन ने कहा कि वह माध्यमिक स्तर पर बच्चों खासकर लड़कों को घरेलू कामकाज की शिक्षा प्रदान करते हैं। यह मुख्य पाठ्यक्रम से अतिरिक्त होता है। चूंकि एनसीआरटीई की ओर से माध्यमिक स्तर के बच्चों के लिए होम साइंस तथा स्वास्थ्य से जुड़ी कोई पुस्तक नहीं प्रस्तावित की गई है ऐसे में उन्होंने स्कूल पुस्तकों के प्रतिष्ठित प्रकाशक एस चांद की इस पुस्तक को पाठ्यक्रम में शामिल कर लिया था।