क्रिसमस के मौके पर लोगों को सबसे ज्यादा क्रेज क्रिसमस ट्री सजाने को लेकर होता है। लेकिन ब्रिटेन में इस बार क्रिसमस के अवसर पर क्रिसमस ट्री की कमी देखने को मिल सकती है क्योंकि यहां क्रिसमस ट्री के बागान रहस्यमय फफूंद की बीमारी की चपेट में आ गए हैं।
विशेषज्ञों ने इस बीमारी के क्रिसमस ट्री के सभी बागानों के पेड़ों में फैलने की भी आशंका जताई है। ब्रिटेन में क्रिसमस के मौके पर बिकने वाले पांच में से हर चौथा क्रिसमस ट्री नार्डमन फर प्रजाति का होता है। क्रिसमस ट्री की यही प्रजाति फफूंद की चपेट में आई है।
फफूंद के कारण होने वाली इस बीमारी को कर्नंट सीजन डबल नीडल के नाम से जाना जाता है। जिसमें पतझड़ से पहले गर्मियों में पेड़ की नुकीली पत्तियां भूरी हो जाती हैं। ऐसा माना जा रहा है कि नार्डमन फर के जो बीज कॉकेशस क्षेत्र से मंगाए गए उनमें यह बीमारी थी और इस तरह यह बीमारी ब्रिटेन के क्रिसमस ट्री के बागानों में फैल गई।
देश भर में क्रिसमस ट्री की खेती करने वाले 150 से अधिक उत्पादकों ने अपनी फसल के लगभग तीन प्रतिशत तक के बरबाद हो जाने की जानकारी दी है। ब्रिटेन के क्रिसमस ट्री उत्पादक संघ ने चेतावनी जारी की है कि अगर इस बीमारी पर समय रहते काबू नहीं पाया गया तो भविष्य में क्रिसमस ट्री की बाजार कीमत पर इसका बुरा असर पड़ सकता है।
ब्रिटेन में क्रिसमस के मौके पर हर साल 75 अरब से अधिक क्रिसमस ट्री बेचे जाते हैं। जिनमें से 20 से 40 लाख पेड़ यहीं पर उगाए जाते हैं और शेष यूरोप के अन्य हिस्सों से मंगाए जाते हैं। क्रिसमस के एक पेड़ को छह फुट पर ऊंचाई प्राप्त करने में आठ साल का समय लगता है और इस बीमारी के कारण इस पेड़ पर आने वाले फर बीमारी से संक्रमित हैं।