कहते हैं कि शराब की आदत ऐसी बला है जिसे अच्छे से अच्छा छोड़ नहीं पाता। जिस आदत को दवा, इलाज बीवी बच्चों का प्यार तक नहीं छुड़ा पाया, उसी शराब की आदत को महज एक 'नाम' ने छुड़ा दिया। जी हां भक्ति में शक्ति का उदाहरण देखना हो तो इलाहाबाद में महाकुंभ नगर में विनोद मिश्र से को देखिए। कभी महा शराबी कहलाने वाले विनोद मिश्र पिछले चार साल से राम नाम लिख और जप रहे हैं। विनोद इस बात के जीते जागते उदाहरण है कि महज राम नाम की महिमा किसी भी बुराई को दूर कर सकती है।
ये जनाब हैं बलिया के विनोद मिश्रा। राम भक्त विनोद पिछले चार साल से राम जप और राम नाम लिखने में लीन हैं। वे राम नाम के दीवाने हैं। बलिया में किशनपुरा बहुआरा गांव निवासी रिटायर्ड आरपीएफ इंस्पेक्टर गोरखनाथ मिश्र के पुत्र विनोद मिश्र चार साल पहले 2009 में राम की भक्ति में डूबे। वह संगम तट पर माघ मेले में आए थे। यहीं उन्हें एक राम भक्त ने राम नाम की शक्ति के बारे में बताया। उस वक्त विनोद शराब के भयंकर लती थे। काफी दवा इलाज कराया लेकिन विनोद की शराब नहीं छूटी। यहां तक कि घर-परिवार में लोग उनसे नाराज रहते थे। लेकिन जब विनोद को राम नाम की लगन लगी तो शराब खुद ही छूट गई। जो काम कोई नहीं कर पाया राम के नाम ने कर दिखाया।
तब से अब में बहुत बदल गए हैं विनोद। वह कहते हैं कि मैं अब राम भक्ति में इस कदर लीन हूं कि किसी और नशे के बारे में सोच भी नहीं सकता। पिछले चार साल में विनोद ने तीन मोटी कापियां भर डाली हैं राम नाम लिखकर। बेहद बारीक शब्दों में लिखते हैं वह राम-राम। अनुमान है कि एक करोड़ से ज्यादा राम नाम लिख चुके हैं वह। राम नाम लिख उन्होंने पन्नों पर कई आकृतियां बनाई हैं।
इधर कुछ दिनों से वह संगम नोज के पास पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर राम नाम लिखने में जुटे हैं। विनोद बताते हैं कि दिन में 5-6 घंटे राम नाम लिखने के बाद शाम को रामायण का वाचन करते हैं। इस दौरान वे विश्व में शांति की कामना करते रहते हैं। भोपाल के भंडारी पुरी और सतना जनपद के राजाराम दास भी उनके साथ रामनाम लेखन में जुटे हैं।