सुनने में भले ही ये अटपटा लगे लेकिन ये सच है। मेडिकल साइंस में इस तरह के उदाहरण काफी चुनिंदा हैं। 400 सालों में अब तक सिर्फ 300 मामले ही ऐसे आए हैं, जिसमें किसी महिला ने 'ममी' को जन्म दिया हो।
अमेजिंग एंड वीयर्ड डॉट कॉम के मुताबिक, साल 1955 में 26 साल की जहरा अबुतालिब उस दिन अस्पताल पहुंची, उन्हें लगा कि आज ही उनके बच्चे का जन्म होगा। लेकिन 48 घंटे के लेबर के बावजूद बच्चे का जन्म नहीं हुआ।
सामान्य डिलीवरी नहीं हुई तो उन्होंने ऑपरेशन करने की छूट दे दी। लेकिन ऑपरेशन के डर से उसने डॉक्टरों को ऑपरेशन नहीं करने दिया और घर लौट आई। फिर उसने खुद को वहीं कैद कर लिया और बिना डिलीवरी उसकी स्थिति सामान्य भी हो गई।
बुत में आ गई जान
ऐसा करने के बाद इस महिला ने पूरे 50 बाद बच्चे को जन्म दिया। आम बोलचाल में जहां इस बच्चे को ममी बेबी कहते हैं वहीं वैज्ञानिक जुबान में इसे लीदोपेडियन कहते हैं।
ऐसा दुर्लभ वाकया तब पेश आता है जब एब्डोमिनल प्रेगनेंसी के दौरान भ्रूण में प्राण नहीं रहते। लेकिन ये इतना बड़ा हो जाता है कि शरीर इसे अपना हिस्सा नहीं बना पाता। साथ ही यह मां के शरीर को मृत टिशू से दूर रखकर इंफेक्शन से दूर रखता है।
लगभग 50 साल बाद जोहरा को जब दोबारा प्रसव पीड़ा हुई तो उनका बेटा उन्हे एक विशेषज्ञ के पास लेकर गया। कई जांच, एक्स-रे के बाद जहरा के गर्भ में कुछ उभरी हुई संरचना नजर आई।
डॉक्टरों ने जहरा का ऑपरेशन करके उस मृत भू्ण को निकाला, जो बिल्कुल ममी जैसा नजर आ रहा था।