कहते हैं कि शिक्षा उम्र की मोहताज नहीं
होती। पढ़ाई जब भी शुरू की जाए अच्छी ही होती है। ये बात साबित कर दी है
किसान नेता ने। इन्होंने 65 साल की उम्र में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है।
किसान नेता कृष्णस्वरुप गोरखपुरिया ने 65 वर्ष की उम्र में एमए (इतिहास) प्रथम वर्ष की परीक्षा अच्छे अंकों से पास करके साबित कर दिया कि मेहनत और लगन हो तो उम्र आड़े नहीं आती। उन्होंने यह परीक्षा अंग्रेजी माध्यम से दी। खास बात यह भी रही कि गोरखपुरिया 43 साल बाद किसी परीक्षा में बैठे, क्योंकि 43 पहले उन्होंने बीए पास की थी।
छह महीने पहले जब कृष्ण स्वरुप गोरखपुरिया इम्तिहान देने दयानंद कालेज हिसार में एक परीक्षार्थी के रूप में बैठे तो बहुत कम लोग ही जानते थे कि 50 वर्ष से राजनीति में सक्रिय किसान नेता अपनी इस उम्र में भी परीक्षा दे सकेंगे। जब उन्होंने प्रथम पेपर लिखना शुरू किया तो लंबे समय तक लिखने का अभ्यास न होने के कारण एक घंटे बाद ही उनके हाथ थक गए। उन्होंने बड़ी मुश्किल से तीन घंटे में केवल 18 पेज ही लिखे, जबकि 43 वर्ष पूर्व बीए फाइनल में उन्होंने इतिहास के पेपर में 60 से ज्यादा पेज लिखकर 64 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे। फिर भी उन्होंने पेपर लिखना जारी रखा।
प्रथम पेपर में 18 पेज लिखने वाले गोरखपुरिया ने पांचवें पेपर में 28 पेज लिख डाले और हाल में घोषित कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में एमए इतिहास के प्रथम वर्ष में 53 प्रतिशत से ज्यादा अंक प्राप्त करके परीक्षा पास कर ली। मनीराम बागड़ी के चुनाव में स्कूल में पढ़ते हुए उन्होंने 1962 में लोकसभा चुनाव में पहली बार एक कार्यकर्ता के तौर पर राजनीति की शुरूआत की थी। इसके बाद 50 वर्ष तक लगातार छात्रों, कर्मचारियों, मजदूरों, किसानों व आम जनता के हक में आंदोलनों में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया है और इस दौरान दर्जनों बार जेल, पुलिस दमन और गिरफ्तारी का सामना किया।