कहने को तो कानपुर के हितकारी नगर स्थित यह मकान लैकफेड घोटाले के मुख्य आरोपी और पूर्व चेयरमैन सुशील कटियार की संपत्तियों का एक तुच्छ टुकड़ा मात्र है, मगर इसे देखकर सुशील की शौकीन तबीयत का अंदाजा लगाया जा सकता है। इस गली में यह सबसे ऊंचा मकान है। बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर के अलावा यहां चार और मंजिल हैं। भीतर पूरी तरह मार्बल फिनिश है। शायद ही कोई कोना हो, जहां संगमरमर न लगा हो।
सवा सौ वर्ग गज एरिया में बने मकान के ग्राउंड फ्लोर में सबसे पीछे एक ऑफिसनुमा कमरा बना है। इसी के साथ एक छोटा सा रास्ता बेसमेंट में गया है। नीचे जाने वाली सीढ़ियों के साथ चार-चार फुट तक कीमती लकड़ी दीवारों पर जड़ी है। नीचे एक बड़ा सा हॉल है। यहां काफी महंगा फर्नीचर और सेंटर टेबल रखी है। कंप्यूटर रखने के लिए तीन स्थान बने हैं। इससे लगता है कि यहां कुछ महत्वपूर्ण कार्य होता था। आसपास के लोग बताते हैं कि यहां सुशील अपना ऑफिस चलाता था।
यूपीएसआईडीसी, केडीए-नगर निगम आदि में ठेकेदारी के अलावा लैकफेड और एनआरएचएम से संबंधित हिसाब-किताब इन्हीं कंप्यूटरों पर होता था। मगर अब कंप्यूटर अपनी जगह पर नहीं हैं। ग्राउंड फ्लोर से ऊपर चढ़ने पर एक बेडरूम के साथ काफी बड़ा अटैच बाथरूम है। इस बाथरूम में जकूजी और स्टीम बाथ के लिए पूरा इंतजाम है। इस पर जमी धूल से स्पष्ट था कि यह कई दिन से इस्तेमाल नहीं किया गया है। यहां बने लगभग दस कमरों में ऐसा एक भी नहीं था, जिसमें विंडो या फिर स्पिलिट एसी न लगा हो। हालांकि ज्यादातर एसी गायब हो चुके हैं।
पड़ोसियों ने बताया कि यहां अक्सर लोगों का आना-जाना लगा रहता था। वे कई-कई दिन तक रुकते थे। मकान इसी लिहाज से बनवाया गया था। रात-रात तक बैठकें चलती थीं और जाम छलकते थे।