ये जन्म लेने वाले पर निर्भर नहीं करता है कि वो कहां जन्म ले। लेकिन धरती पर जन्म लेने वाली जगह से वो खुशकिस्मत या फिर बदकिस्मत बन जाया करता है।
इन सौ नन्हीं जानों के लिए भी हम ऐसा ही कह सकते हैं। इनकी कोई गलती न भी होते हुए इन्हें जमीन में जिंदा ही दफना दिया गया।
दफनाया भी इस दर्दनाक तरीके से जिसमें मानवता कहीं भी दिखाई नहीं दी। वो आखिरी सांस तक चिल्लाते रहे, लेकिन उनको दफनाने वाले दरिंदे अपना काम कर वहां से चलते बने।
मंगोलियन बॉर्डर पर हुआ ये काम
आपको बताएं कि सौ नन्ही जानें सौ पिल्लों की थी। इनका कुसूर बस इतना सा था कि वो गली में पैदा हुए हैं।
गली के कुत्तों का सड़क पर पैदा होना और बढ़ते-बढ़ते भौंकते रहना कुछ लोगों को इतना नागवर गुजरा कि उन लोगों ने उन सभी सौ पिल्लों को एक खुले गढ्ढे में दफना दिया।
दरअसल वो गढ्ढा कुद लोगों ने किसी और काम से खोला था। उस दिन कोई काम न हो पाने की वजह से गढ्ढे को खुला ही छोड़कर निकल पड़े थे।
अगले दिन दिखा कुछ भयंकर
जब वो सरकारी लोग सुबह वापस काम करने के लिए गढ्ढे के पास पहुंचे तो उन्होंने देखा कि वो गढ्ढा भर दिया गया है।
उन्होंने नोटिस किया कि गढ्ढे से कुछ आवाज सुनाई दे रही है। आवाज सुनते ही उन लोगों को कुछ शक हुआ और उन्होंने फौरन गढ्ढा खोलना फिर से चालू किया।
ऐसा करते ही उन्होंने देखा कि गढ्ढे में कई सारे पिल्ले और कुछ छोटे कुत्ते मरे हुए हैं। ये सभी घुटघुटकर रात ही मारे गए थे।
बचा बस एक पिल्ला
उन सभी सौ पिल्लों में एक पिल्ला सुबह तक जिंदा मिला। उसकी सांसे बहुत धीरे-धीरे चल रही थी।
उसके साथ ही तीन छोटे कुत्तों को भी गढ्ढे से निकाला गया और अभी उन्हें चीन के एनिमल ट्रस्ट वाले लोग सही इलाज के लिए ले गए हैं।
ऐसे काम को किसने अंजाम दिया, इसका पता नहीं चल पाया है। लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि सरकार के ही कुछ लोगों ने मिलकर ये काम किया है क्योंकि गढ्ढा खोदने के बारे में सिर्फ उन्हें ही पता था।
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