नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया जाए, इस कामना के साथ 71 साल के वल्लभदास चूड़ासमा गुजरात से इलाहाबाद पैदल चले आए। उन्होंने तकरीबन 1400 किमी की यात्रा डेढ़ माह में पूरी की। वह प्रतिदिन औसतन 45 किमी पैदल चलते हैं। यहां पहुंचकर काफी खुश हैं।
उनका मानना है कि कुंभ में संतों के सम्मेलन में जिस तरह मोदी के नाम पर चर्चा की जा रही है, उससे लगता है कि उनकी कामना यहां जरूर पूरी होगी और भाजपा कुंभ नगरी से मोदी को प्रधानमंत्री पद के लिए उम्मीदवार घोषित कर देगी।
वल्लभदास किसी पार्टी के नेता या कार्यकर्ता नहीं हैं। पैदल चलना उनका शौक और जुनून भी है। वर्ष 2003 में एक निजी कंपनी से उप प्रबंधक पद से रिटायर हुए वल्लभदास को पैदल चलने की प्रेरणा उनकी पत्नी पुष्पा बेन से मिली और वह पूरे देश में भ्रूण हत्या के खिलाफ और भाईचारे के समर्थन में अलख जगाने निकल पड़े।
उनका दावा है कि वह अब तक 66 हजार 500 किमी की दूरी पैदल तय कर चुके हैं। प्रतिदिन औसतन 45 किमी पैदल चलते हैं। उनके एक पुत्र और दो पुत्रियां हैं। वह पारिवारिक जिम्मेदारी से मुक्त हो चुके हैं। वल्लघ्भदास ने बताया कि वह किसी पार्टी में नहीं हैं और न ही उन्हें राजनीति करनी है। सिर्फ इतना चाहते हैं कि गुजरात जैसा विकास पूरे देश में हो। बिना दहेज के शादियां हों और बेटियों को बेटों के समान दर्जा मिले।
जिस तरह मोदी ने गुजरात की सूरत बदली, उसी तरह पूरे देश में बदलाव की कामना लेकर वह पिछले साल बड़ौदा स्थित अपने निवास से 22 दिसंबर को कुंभ नगरी के लिए पैदल निकले। यहां पहुंचने के बाद वल्लभदास ने कहा कि उन्हें मन मांगी मुराद मिल गई। संतों ने मोदी के नाम का प्रस्ताव रख दिया है। उम्मीद करते हैं कि संगम की धरती से भाजपा मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर देगी।