महाकुंभ मेले में ऐसे भी बाबा हैं जो सिर्फ बेसहारा बच्चों की सेवा कर रहे हैं। एचआईवी एड्स के खिलाफ काम कर रहे महामंडलेश्वर स्वामी ब्रह्मांडपुरी जी उन्हीं में से एक हैं। वह ऐसे बच्चों को पाल रहे हैं जिनके माता-पिता की एड्स से मौत हो गई। उनके आश्रम में इन बच्चों का इलाज, पढ़ाई-लिखाई सब हो रही है।
महाकुंभ मेले में भी वह लोगों को एड्स के प्रति जागरूक कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि उनके पास आयुर्वेद में एड्स से बचाव का उपाय है, जिसके जरिए वह लोगों का उपचार भी कर रहे हैं। दावा किया कि इस उपचार से दो वर्ष में एड्स जड़ से समाप्त हो जाएगा।
स्वामी ब्रह्मांडपुरी जलगांव (महाराष्ट्र) स्थित ब्रह्मनंद आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान में महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों के ऐसे बच्चों की देखभाल और पढ़ाई हो रही है, जो एड्स से पीड़ित हैं। उन्होंने महाराष्ट्र सहित देश के अन्य हिस्सों में तेजी से फैलते एड्स के प्रति लोगों को जागरूक और उपचार करने का काम बरसों पहले शुरू किया। संस्थान के संपर्क में रहने वाले लोग एड्स पीड़ितों और उनके बच्चों को आश्रम तक पहुंचाते हैं। यहां पहुंचने के बाद उनकी जांच और उसके बाद उपचार शुरू होता है।
स्वामी ब्रह्मांडपुरी महाकुंभ मेला में सेक्टर सात गंगेश्वर मार्ग पर प्रज्ञानंद शिविर के सामने अपने शिविर में लोगों को एड्स के प्रति जागरूक कर रहे हैं। बताया कि यहां जांच में जिन लोगों को एड्स का पता चलेगा, उनका इलाज भी जलगांव में होगा।
स्वामीजी का कहना है कि एचआईवी एड्स वायरस है, मृत्यु इससे नहीं, बल्कि इससे होने वाली पूरक बीमारियां जैसे लीवर डैमेज, पीलिया, हार्पीज, ब्रोनकाइटिस, हेपेटाइटिस, टीवी आदि के कारण होती हैं, क्योंकि इनके प्रभाव से शरीर दुर्बल होता जाता है।
उनका कहना है कि आयुर्वेद में प्रभावी दवाएं मौजूद हैं जिससे एड्स को ठीक किया जा सकता है। कहा कि एड्स पीड़ित व्यक्ति इलाज से पूर्व विभिन्न टेस्टों से गुजर कर मानसिक रूप से इतना चिंतित हो जाता है कि उसे लगने लगता है कि स्वस्थ नहीं हो सकते। ऐसी स्थिति में औषधि के साथ विश्वास दिलाया जाना, आस्था को जागृत करना अत्यंत जरूरी है।
स्वास्थ्य विभाग की बेरुखी से दुखी
स्वामी ब्रह्मांडपुरी केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग की बेरुखी से दुखी हैं। उन्होंने विभाग को कई बार पत्र लिखा और उनकी आयुर्वेद तकनीक पर काम करने का अनुरोध किया लेकिन विभाग ने इसे कभी भी गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने पिछले वर्ष जुलाई में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल को पत्र लिखा। इस पर राष्ट्रपति ने केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग को ब्रह्मानंद आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान की बात सुनने का आदेश दिया लेकिन विभाग ने राष्ट्रपति के आदेश को भी अनदेखा कर दिया। उनका दावा है कि केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग सहयोग करे तो देश से एड्स को पूरी तरह खत्म किया जा सकता है।