कुंभ मेले में शंकराचार्य चतुष्पथ को लेकर आमरण अनशन पर बैठे स्वामी परिपूर्णानंद के मामले में पुलिस का दांव उल्टा पड़ गया है। हाईकोर्ट में दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर जवाब दाखिल करते हुए पुलिस ने बाबा को हत्या आरोपी और फरार मुल्जिम बताया था।
याचिका दाखिल करने वाले अधिवक्ता शैलेंद्र अवस्थी ने सोमवार को स्वामी परिपूर्णानंद पर चले अभियोग में अदालत का आदेश कोर्ट में पेश किया। आदेश के अनुसार परिपूर्णानंद पर मुकदमा चला था मगर उसमें वह 1996 में ही निर्दोष करार दिए जा चुके हैं। इसके बाद उन्होंने संन्यास ले लिया था।
इस प्रकार से उनको आरोपी और फरार बताने की कहानी झूठी है। अधिवक्ता के मुताबिक अपनी जमीनें बेचकर गांव छोड़ देने का आरोप भी गलत है। उनकी जमीनें गांव में ही हैं और बेटे डबरा में रहने लगे जो उनके गांव से ज्यादा दूर नहीं है। प्रदेश सरकार की ओर से कहा गया है उनका जवाब अभी तैयार नहीं है। इस पर कोर्ट ने मंगलवार को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।