महाकुंभ में दुनिया भर से पहुंचने वाले श्रद्धालु, स्नानार्थी जिन संतों, महंतों के सामने शीश नवाकर आशीर्वाद लेते हैं, उनमें से कई संत रोज शहीदों के इस गांव में शीश झुकाते हैं। कुंभनगरी में एक शिविर ऐसा भी है, जो शहीदों के नाम समर्पित है। धर्मनगरी में लोगों की आस्था का केंद्र बने इस शिविर में उनकी पूजा हो रही है जो देश के भीतर शांति और सीमाओं पर सुरक्षा के लिए शहीद हो गए। यहां सुबह, शाम के अनुष्ठान में अमर शहीदों और भारत माता के नाम के जयकारे गूंजते हैं।
कुंभ क्षेत्र में सेक्टर नौ में संत बालक योगेश्वर दासका पूरा शिविर शहीदों के नाम है। उन्होंने इसे शहीदों के गांव का नाम ही दे दिया है। परिसर में बने शतकुंडीय यज्ञ मंडप के भीतर शहीदों की आत्मा की शांति और सीमा पर तैनात जवानों को शक्ति, आत्मबल प्रदान करने के लिए लगातार याज्ञिक अनुष्ठान चल रहा है।
यज्ञ मंडप के बाहर देवी देवताओं के नहीं बल्कि शहीदों के चित्र सजे हैं। इसमें चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, राजगुरु से लेकर कारगिल, मुंबई और ताजा हमलों में शहीद हुए जवानों का संक्षिप्त विवरण, उनके उद्गार भी शामिल हैं। इनके दर्शन और यज्ञ मंडप की परिक्रमा के लिए आम श्रद्धालु ही नहीं संत भी पहुंचते हैं।
संत बालक योगेश्वर दास के मुताबिक शहीदों और सैनिकों के लिए यह महायज्ञ माघ पूर्णिमा तक चलेगा। यह अतिरुद्र महायज्ञ पंडित मृदुलु बिहारी करा रहे हैं। महायज्ञ में शामिल होने के लिए मुम्बई हमले में शहीद हुए सैनिकों के साथ काश्मीर, झारखंड में शहीद लोगों के परिवारीजनों को बुलाया गया है।
पांच सौ पुरोहित मंत्रोच्चार करेंगे और शहीद परिवारों की ओर से सवा करोड़ आहुतियां डाली जाएंगी। यज्ञ में कश्मीर, झारखंड में शहीद हुए जवानों, मुंबई हमले में शहीद हेमंत करकरे, सुशांक शिंदे, तुकाराम ओमले, कारगिल में शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा, कर्नल विजयंत थापर, कैप्टन मनोज पांडेय, मेजर सुधीर, कैप्टन सौरभ, सूबेदार बहादुर सहित डेढ़ सौ शहीदों के परिवारों के सदस्य शामिल होंगे।
पहली बार द्रास में जुटे शहीद परिवार
संत बालक योगेश्वर दास के मुताबिक नौ वर्ष पहले जम्मू में एक यज्ञ के दौरान मेजर अजय सिंह जसरोटिया के माता-पिता से मुलाकात हुई। उसके बाद से ही लगा कि शहीदों के नाम यज्ञ ज्यादा बेहतर है। वे कई मायनों में सबसे बड़ा समर्पण करते हैं। उसके बाद से ही शहीदों के नाम गांव बस गया।
कारगिल के द्रास सेक्टर में टोलोलिंग और टाइगर हिल के बीच यज्ञ हुआ था जिसमें अनेक शहीद परिवारों के सदस्य जुटे। वह जगह देखकर सभी ऐसे भावुक हुए कि कुछ देर के लिए कोई किसी को चुप कराने वाला नहीं रहा। तभी से यह सिलसिला जारी है।
शहीदस्थलों के नाम पर ही शिविर
अतिरुद्र महायज्ञ सेवा समिति की कुंभनगरी की छावनी में सैनिक परिवारों के रहने के लिए बनाए गए शिविरों के तीन अलग-अलग सेक्टरों के नाम भी शहीद स्थलों के नाम पर रखे गए हैं। इनके नाम तोलोलिंग, बटालिक और टाइगर हिल हैं।
सारा पुण्य शहीदों के नाम
छावनी में आयोजित यज्ञ सहित सभी धार्मिक अनुष्ठानों के पुण्य का संकल्प भी शहीदों के ही नाम है। अखंड हरिनाम संकीर्तन में जप और संकल्प के अतिरिक्त जरूरतमंदों के बीच सामग्री का वितरण और भंडारा तक का पुण्य भी शहीदों को समर्पित है।