‘जहां राम, वहीं अयोध्या’ की तर्ज पर ही जूना के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि के साथ उनका मंदिर भी कुंभ क्षेत्र स्थित उनके शिविर में मौजूद है। देश और दुनिया के दौरे पर आचार्य जहां-जहां जाते हैं, उनका मंदिर भी साथ होता है। शिविर के साधक उसे ‘मोबाइल टेंपल’ कहते हैं।
स्वामी अवधेशानंद गिरि के मुताबिक यहां आराधना के बाद ही दिनचर्या की शुरुआत और समापन होता है। यहीं अखाड़े की कुशलता और सभी विघ्नों के निवारण की प्रार्थना की जाती है।
यह मंदिर पूरी शैव उपासना पद्धति का प्रतीक भी है। यहीं से दशनाम संन्यासियों के सबसे बड़े अखाड़े, पंचदशनाम जूना अखाड़ा के 161 महामंडलेश्वरों, हजारों साधु-महात्माओं और लाखों अनुयायियों के लोकमंगल की कामना की जाती है। इसीलिए प्रभु प्रेमी संघ के शिविर में दत्तात्रेय का अलग मंदिर भी है।
इसमें भगवान दत्तात्रेय के अतिरिक्त सिद्धि विनायक गणेश, विष्णु, सूर्य, दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती सहित तकरीबन तीन सौ वर्ष प्राचीन माणिक्य का शिवलिंग, पन्ना का श्रीयंत्र, सिद्ध नवग्रह यंत्र, पारद शिवलिंग, बद्रेश, भगवान श्रीनाथ, लड्डू गोपाल के साथ सोने और चांदी से बना अद्भुत राम दरबार भी है।
इन सभी देवी-देवताओं के विग्रह में उनकी सवारी और शस्त्र भी हैं। सबसे आगे भगवान दत्तात्रेय की चरणपादुका और विग्रह के कोने में श्यामा तुलसी का बिरवा भी है। मंदिर की पवित्रता के लिए ही गंगा की मिट्टी और गोबर से उसकी दीवारों की लिपाई की गई है। खास यह कि पूरा मंदिर ‘मोबाइल’ है, जो आचार्य के कहीं भी पहुंचने के साथ स्थायी रूप ले लेता है।