ज्योतिषशास्त्र में बुध को गुरु की नाजायज संतान कहा गया है। लेकिन इसे नवग्रहों में राजकुमार का पद प्राप्त है। ज्योतिष के ग्रंथों में बतया गया है कि बुध एक नपुंसक ग्रह है और इसकी विशेष स्थिति व्यक्ति की कामेच्छा को कम कर देती है।
कमेच्छा में कमी कब
जिस व्यक्ति की कुण्डली में बुध सातवें घर में कन्या या मिथुन राशि में होता है उन्हें वैवाहिक जीवन का भरपूर सुख देता है।
लेकिन मेष राशि में सातवें घर में बुध बैठा हो तब तो समझ लीजिए जीवनसाथी के साथ तालमेल का अभाव हो सकता है। व्यक्ति में कामेच्छा की कमी हो सकती है।
हलांकि विपरीत लिंग के व्यक्तियों में इनकी खूब रुचि होती है। अगर जीवनसाथी के ग्रह मजबूत नहीं हुए तब दो शादी की भी संभावना रहती है।
तब बुध करवाता है भाग्योदय और धन लाभ
सातवें घर में मेष राशि में बैठा बुध भले ही व्यक्ति की कामेच्छा को कम कर दे लेकिन इसकी एक अच्छी बात यह है कि विवाह के बाद बुध भाग्योदय करवाता है। पिता से धन लाभ मिलता है। ऐसे व्यक्ति पढ़ने लिखने में होशियार होते हैं।