अबीर गुलाल के बादल छा रहे, होली है होली है, शोर मचा रहे, झोली भर भर गुलाल की मारी, आज रंग बरस रहा... श्री जी श्याम के प्रेम को पाने के लिए भक्त अपनी झोली फैलाए थे।
लड्डू होली पर ऊपर से बरसते लड्डुओं को लपकने की होड़ मची थी पर 4:30 बजते ही श्री जी मंदिर को लाल घटा ने ढांप लिया। श्यामा श्याम ने जब लाल गुलाल की भर भर झोली मारी तो सारी दुनिया झूम उठी। बुधवार शाम लाडली जी के मंदिर में लड्डू होली का विहंगम नजारा था।
राधे कृष्ण के प्रेम के रंग में रंगने को हजारों किमी. का फासला तय कर लाखों भक्त यहां पहुंचे थे। उस अलौकिक रंग में सराबोर होकर हिया ऐसा हर्षाया कि कदम खुद ही थिरकने लगे। बरसाने में त्रिभुवन का आनंद समा गया। समूचा मंदिर रसिकों से अटा था।
दोपहर के 3 बजते ही भक्तों का मेला श्री जी मंदिर में जुट गया। हाथ ऊपर उठाए राधे राधे की रट लगाए कपाट खुलने का इंतजार कर रहे थे। 4 बजते ही पट खुले और मंदिर में लड्डू होरी का उत्सव शुरू हुआ। भक्तों ने श्री जी के दर्शन कर उन्हें गुलाल और लड्डू अर्पित किए।
नंदगांव से कृष्ण स्वरूप पाड़ौ सज धज कर बरसाने फाग मनाने आया। गोस्वामियों ने उसका बूंदी के लड्डुओं से स्वागत किया। ढप, झांझ, मृदंग संग समाज जुड़ी और गोस्वामी गाने लगे, नंदगांव कौ पाड़ौ बरसाने आयो, होरी कौ पकवान, भर भर झोरी खायौ... उसके बाद तो चारों ओर से लड्डू बरसे जिन्हें लूटने को असंख्य हाथ ऊपर उठे थे। महिलाएं झोलियां फैलाए थीं। लड्डू ही नहीं, बिस्किट, टॉफी सब की बौछार हुई। उसके बाद समूचा मंदिर प्रेम के लाल सरोवर में सराबोर हो गया।
रंगीली होली श्यामा से चलो बरसाने में खेलेंगे
उमंग और उल्लास की थाह नहीं थी। रोम रोम स्पंदित था। मंदिर के नीचे प्रांगण में फाग की सुरीली बौछार हुई तो रसिक बौराने होकर नाचने लगे। रंगीली होली श्यामा से चलो बरसाने में खेलेंगे.. फरिया ओढ़ एक श्यामा बना, दूजा श्याम और हिल मिलकर झूमने लगे। उस असीम आनंद की अनुभूति उनके चेहरों पर झलक रही थीं।