फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कुंभ मेले में खर्च धनराशि का ब्योरा हाईकोर्ट में तलब

Fri, 22 Feb 2013 12:50 PM IST
लखनऊ/ब्यूरो
विज्ञापन
विज्ञापन
हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने महाकुंभ हादसे में सख्त रुख अपनाया है। एक लंबित याचिका पर कोर्ट ने केंद्र व राज्य सरकार से कुंभ मेले में खर्च की गई धनराशि का ब्योरा तलब किया है। साथ ही राज्य सरकार व रेलवे से 10 फरवरी को हुए हादसे में दौरान वहां तैनात अधिकारियों की विस्तृत जानकारी मांगी है।
विज्ञापन


घटना के वक्त तैनात अधिकारियों से भी शपथ पत्र देने को कहा है। यह आदेश बृहस्पतिवार को वरिष्ठ न्यायमूर्ति उमानाथ सिंह व न्यायमूर्ति विनय कुमार माथुर की खंडपीठ ने दिया। मामले में अगली सुनवाई 15 मार्च को होगी।

राजेंद्र दास चेला महंत नंदराम दास ने याचिका दायर कर कोर्ट से कुंभ मेले में उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ के मद्देनजर इंतजाम किए जाने का अनुरोध किया गया था। इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार से मेले का बजट प्रावधान समेत मेले में विभिन्न मदों में खर्च धनराशि का ब्योरा राज्य सरकार से मांगा है।
विज्ञापन


कोर्ट ने राज्य सरकार से हलफनामे में यह भी ब्यौरा देने को कहा कि हादसे के दौरान व बाद में पीड़ितों को क्या चिकित्सा और वित्तीय सुविधाएं मुहैया कराई गईं।

इसके अलावा कोर्ट ने हादसे के दौरान मारे गए लोगों की वास्तविक संख्या में विरोधाभास पर केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह इस बात का व्यापक प्रचार-प्रसार करे कि जिन लोगों के सगे संबंधी हादसे में मारे गए थे, वे सीधे इलाहाबाद हाईकोर्ट व लखनऊ बेंच के रजिस्ट्रार को सीधे अर्जियां देकर इस संबंध में जानकारी दे सकें, ताकि हादसे में मारे गए लोगों की वास्तविक संख्या का पता चल सके।

कोर्ट ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार यह प्रचार प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जरिये तब तक कराए, जब तक कोर्ट को वांछित जानकारी उपलब्ध न हो जाए। यही नहीं कोर्ट ने रेलवे व राज्य सरकार को निर्देश दिया कि दोनों हलफनामा पेश कर यह बताएं कि हादसे वाले दिन 10 फरवरी को इलाहाबाद रेलवे स्टेशन व अन्य स्टेशनों और मेला क्षेत्र के सेक्टर-12 में किस तरह की व्यवस्थाएं की गई थीं।

राष्ट्रीय व रेलवे आपदा प्रबंधन की क्या थी भूमिका
लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने केंद्र सरकार से हलफनामे पर जानकारी मांगी है कि कुंभ हादसे के दौरान व बाद में राष्ट्रीय व रेलवे आपदा प्रबंधन एजेंसी की क्या भूमिका थी। साथ ही वरिष्ठ न्यायमूर्ति उमानाथ सिंह व न्यायमूर्ति विनय कुमार माथुर की खंडपीठ ने रेलवे को निर्देश दिया कि हलफनामे में यह भी बताएं कि उस दिन अगर कोई खास इंतजाम किए गए थे, मसलन बढ़ाई गई ट्रेनों की संख्या, बिके टिकट और अर्जित राजस्व की जानकारी दे।
विज्ञापन


और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें