हम किसी और देश की बात नहीं कर रहे यह भारत के राजस्थान का एक गांव है। जैसलमेर से करीब 18 किलोमीटर की दूरी पर बसे इस गांव को कुलधारा के नाम से जाता है। माना जाता है कि यह गांव शापित है।
भानगढ़ के किले की तरह यह गांव भी अचानक ही एक रात में विरान हो गया। उसके बाद से इस गांव में कोई भी बस नहीं पाया। इस गांव के विराने में भी भानगढ़ के किले की तरह एक खूबसूरत लड़की की दास्तान छुपी हुई है।
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माना जाता है कि 1825 के आस-पास यह पालीवाल ब्राह्मणों का गांव हुआ करता था। पालीवाल ब्राह्मण के पूर्वजों का संबंध भगवान श्री कृष्ण की पत्नी रुक्मिणी से जुड़ा हुआ है। माना जाता है कि पालीवान ब्रह्मण इनके पुरोहित हुआ करते थे।
लेकिन जबकि यह घटना है उन दिनों पालीवान किसान हुआ करते थे। यह कृषि के अलावा भवन निर्माण कला में निपुण थे। राज्य के दूसरे गांवों से यह गांव खुशहाल और संपन्न हुआ करता था।
इस गांव के मुखिया की एक बहुत ही सुंदर बेटी थी। जिसके रुप की चर्चा कुलधारा से निकलकर जैसलमेर तक पहुंच चुकी थी। जैसलमेर का दीवान सालिम सिंह मुखिया की बेटी के रुप पर मोहित हो गया और उसे अपने हरम में लाना चाहता था।
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इसके लिए सालिम सिंह ने मुखिया और गांव वालों पर दबाव बनाने लगा। ऐसे में एक रात गांव वालों की पंचायत बुलाई गई और अपने मान-सम्मान की रक्षा के लिए पूरा का पूरा गांव रातों रात गांव छोड़कर कहीं चला गया।
कहते हैं कि जाते जाते पालीवाल ब्राह्मणों ने गांव को शाप दे दिया कि अब यह कभी दुबारा बस नहीं पाएगा। तब से यह गांव विरान पड़ा हुआ है। कहते हैं कि यहां रात में भूत-प्रेत और अजब-अजब सी आवाजें आती हैं।
इसलिए गांव के बाहर एक बड़ा सा दरवाजा लगा दिया गया है। दिन में लोग इस दरवाजे से गांव में जाकर गांव घूम सकते हैं लेकिन रात में इस गांव में कोई नहीं जाता है।