हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से जानना चाहा है कि इस बार के महाकुंभ के अनुभवों से उसने क्या सीखा और उसके मुताबिक अगले मेले में क्या इंतजाम होंगे। कोर्ट ने केंद्र और प्रदेश सरकार को एक माह में अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। ज्ञानेश कमल द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर न्यायमूर्ति सुशील हरकौली और न्यायमूर्ति मनोज मिश्र की खंडपीठ सुनवाई कर रही है। कोर्ट ने सरकार से आगामी योजना और सुधारों के बावत जानकारी मांगी है।
याची का कहना है कि अर्द्ध कुंभ मेले के समय ही उसने व्यवसायिक कंपनियों को जमीनें देने पर आपत्ति की थी। आम स्नानार्थियों के लिए अतिरिक्त आश्रय स्थल और पर्याप्त संख्या में स्नान घाट बनाने की मांग इस बार भी की गई। इसके बावजूद नहाने के लिए सिर्फ 22 स्नान घाट बनाए गए।
शहर के स्कूल-कालेजों को आश्रय स्थल नहीं बनाया गया। ऐसा नहीं करने से मौनी अमावस्या पर आए करोड़ों लोगों के पास रेलवे स्टेशन जाने के सिवा कोई विकल्प नहीं था। मेला प्रशासन ने 150 व्यवसायिक कंपनियों को भूमि आवंटित की जबकि आम लोगों के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई थी। याचिका में भविष्य के लिए ठोस योजना बनाने का निर्देश देने की मांग की गई है।