तीन दिन बाद 25 फरवरी को माघी पूर्णिमा का प्रमुख स्नान पर्व है। मेला प्रशासन का अनुमान है कि एक करोड़ 65 लाख श्रद्धालु स्नान करने पहुंचेंगे लेकिन गंगा-यमुना के बढ़े जलस्तर और तेजी से हो रही कटान ने मेला प्रशासन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कटान और जलस्तर बढ़ने के कारण गंगा पर बने ज्यादातर अस्थायी घाट ध्वस्त हो चुके हैं।
अरैल को संगम से जोड़ने वाला पांटून पुल नंबर-18 भी बढ़े हुए जलस्तर की भेंट चढ़ गया है।
पुल के दो हिस्सों को बीच में जोड़ने वाला टापू जलमग्न हो चुका है। हालांकि बृहस्पतिवार को गंगा-यमुना का जलस्तर कुछ कम होने से मेला प्रशासन ने राहत की सांस ली है। प्रशासन की मंशा है कि शुक्रवार शाम तक की स्थिति का आकलन करने के बाद घाटों को नए सिरे से तैयार करने पर अंतिम फैसला किया जाए और पांटून पुल के लिए भी 23 फरवरी को कोई निर्णय लिया जाए।
अरैल से संगम के बीच बना पांटून पुल गंगा पर बीचों-बीच स्थित टापू से जुड़ा हुआ है। गंगा-यमुना का जलस्तर बढ़ा तो टापू डूब गया। ऐसे में पांटून पुल का बीच वाला हिस्सा, जो दोनों तरफ से सीधे टापू पर उतर रहा था, ध्वस्त हो गया। अरैल से संगम या संगम से अरैल की तरफ आने वाले श्रद्धालुओं को कुछ दूरी इस टापू पर भी तय करनी पड़ती थी, जो तकरीबन चार सौ मीटर लंबा था।
टापू पर वाहनों के चलने के लिए चकर्ड प्लेटें भी बिछाई गई थीं, लेकिन पल का चार सौ मीटर का हिस्सा डूबा हुआ है। इससे पुल पर आवागमन ठप हो चुका है। गंगा-यमुना के जलस्तर में छह-छह सेमी. की गिरावट दर्ज की गई। कमिश्नर देवेश चतुर्वेदी ने बताया कि जलस्तर में गिरावट मेला प्रशासन के लिए शुभ संकेत है।
कुंभ मेला क्षेत्र में भगदड़ की होगी मजिस्ट्रेटी जांच
मेला क्षेत्र में मौनी अमावस्या के दिन सेक्टर-12 में मची भगदड़ और हादसे में दो श्रद्धालुओं की मौत के मामले में मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश जारी किए गए हैं। मेलाधिकारी मणि प्रसाद मिश्र ने अपर जिला मजिस्ट्रेट /अपर मेलाधिकारी अखिलेश ओझा को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। मेलाधिकारी ने जांच रिपोर्ट 11 दिनों में तलब की है।