श्रीमद्भागवत के आचार्य देवकीनंदन ठाकुर ने शुक्रवार को प्रयाग का महात्म्य बताया। कुंभ मेला क्षेत्र के सेक्टर आठ स्थित शिविर में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, प्रयाग देवों की भूमि है। यहां भरत ने गंगा-यमुना से राम के चरणों की भक्ति का आशीष मांगा था। कहा, भक्ति के साथ भागवत सुनने से ज्ञान की प्राप्ति होती है। ज्ञान से त्याग और त्याग की भावना आने से व्यक्ति की सांसारिक मनोकामनाएं पूरी और वासनाएं दूर होती हैं। भागवत कथा परमात्मा से मिलने का माध्यम है, यह साध्य है और साधन भी। भागवत सभी कामनाओं की पूर्ति करती है।
उन्होंने कहा, जो भगवान के भक्त बनते हैं, उन्हें धनवान बनने की जरूरत नहीं होती है। उन पर स्वयं ही लक्ष्मी की कृ पा होती है। यदि व्यक्ति को धन के साथ ईश्वर की भक्ति मिल जाए तो समझना चाहिए कि उस पर परमेश्वर की कृपा हुई। कथा में जगदीश प्रसाद सिंघल, मुन्नी रानी, सुरेश अग्रवाल, शशि, विजय शर्मा, स्याम सुंदर, प्रदीप तिवारी, अंतरिक्ष, इंद्रेश, जगदीश आदि मौजूद थे।
मौन रखकर दी गई श्रद्धांजलि
कथा के दौरान हैदराबाद विस्फोट में मारे गए लोगों की आत्मा की शांति के लिए मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई। श्री देवकीनंदन ठाकुर ने कहा, कोई भी धर्म निर्दोष लोगों की हत्या की शिक्षा नहीं देता है।
गंगा पूजन करके निकाली गई कलश यात्रा
कथा से पहले पुल नंबर चौदह से मंगल कलश यात्रा निकाली गई जो कथा स्थल पहुंचकर पूरी हुई, जहां श्रीमद्भागवत की स्थापना की गई। जयकारों और मंगल गीतों की गूंज के बीच पीले वस्त्र पहने सिर पर कलश लेकर सौभाग्यवती महिलाएं चलीं। मुख्य यजमान सिर पर भागवत की पोथी लेकर चले। यात्रा में दीनदयाल सिंघल, प्रेम ओम प्रकाश अग्रवाल, किशन, जगदीश आदि शामिल थे।