मौनी अमवस्या पर इलाहाबाद जंक्शन पर मची भगदड़ के बाद सोमवार को कुंभ मेले में भी मातम जैसा माहौल दिखा। धार्मिक अनुष्ठान सहित रामलीलाएं, रासलीलाएं और भजन-प्रवचन के कार्यक्रम जरूर हुए लेकिन उसमें उल्लास नहीं सादगी ज्यादा दिखी।
हादसे से आहत विभिन्न अखाड़ों के महंतों, श्रीमहंतों सहित अन्य साधु-संतों, महामंडलेश्वरों की ओर से दुख व्यक्त करते हुए अनुष्ठान से पूर्व दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत की आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की गई।
शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ की देखरेख में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शांति के लिए याज्ञिक अनुष्ठान किया गया। काशी, वृंदावन और प्रयाग के पुरोहितों के आचार्यत्व में शांतिपाठ के बाद ग्यारह हजार आहुतियां भी डाली गईं। शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती के शिविर में भी 108 बटुक ब्राह्मणों की ओर से मृतकों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई।
शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिविर में मृतकों की आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना और पाठ किया गया। शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती के शिविर में वैदिक ब्राह्मणों की ओर से पांच हजार आहुतियां डाली गईं। शांति पाठ के बाद सभी यात्रियों के सकुशल घर पहुंचने की प्रार्थना की गई। सेक्टर छह स्थित महामंडलेश्वर स्वामी महेश्वरानंद की देखरेख में शिविर में भी वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शांति पाठ के बाद आहुतियां डाली गईं।
जूना अखाड़े की ओर से सचिव श्रीमहंत हरिगिरि सहित अन्य श्रीमहंतों की देखरेख में अखाड़े की छावनी और मौजगिरि मंदिर में दिवंगत हुए लोगों की आत्मा की शांति और मेले की कुशलता के लिए याज्ञिक अनुष्ठान किया गया। निरंजनी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रवींद्र पुरी, श्रीमहंत नरेंद्र गिरि, श्रीमहंत रामानंद पुरी सहित अन्य महंतों की मौजूदगी में श्रद्धांजलि सभा में दो मिनट का मौन रखकर मृत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की गई। कामना की गई कि मेले में आए सभी श्रद्धालु सकुशल घर पहुंचें और मेला सकुशल बीते। बड़े हनुमान मंदिर में मंगलवार को दिन में डेढ़ बजे शांति पाठ, याज्ञिक अनुष्ठान किया जाएगा।